📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Syced
विज्ञान
तेलंगाना में घटते जलस्थलों से पलापिट्टा की आबादी पर संकट
✍️ indtoday.com
🗓 04 अक्टू. 2026, 05:16 PM
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संरक्षक चेतावनी दे रहे हैं कि जलस्थलों के सिकुड़ने से पलापिट्टा का आवास तेलंगाना में घट रहा है, जिससे यह प्रजाति खतरे में है।
संरक्षक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पलापिट्टा, जो इस क्षेत्र की एक विशिष्ट जलचर पक्षी है, तेलंगाना में अपने आवास के गंभीर नुकसान का सामना कर रहा है। हालिया क्षेत्रीय निरीक्षणों से पता चलता है कि परम्परागत जलस्थल तेजी से घट रहे हैं।
इस संकुचन के मुख्य कारण कृषि के लिए जल निकासी का बढ़ना, अनियंत्रित शहरी विस्तार और दलदल क्षेत्रों को कृषि भूमि में बदलना हैं। इन कारणों से पक्षी के भोजन और प्रजनन चक्र के लिए आवश्यक उथले जल क्षेत्रों की उपलब्धता कम हो गई है।
स्थानीय वन्यजीव समूहों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में प्रमुख जलस्थल क्षेत्रों में पलापिट्टा के देखे जाने की संख्या में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है। जबकि सटीक जनसंख्या आँकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, इस गिरावट ने त्वरित निगरानी की आवश्यकता को उजागर किया है।
प्राधिकरण और गैर‑सरकारी संगठनों ने शेष जलस्थलों की सुरक्षा, क्षतिग्रस्त आवासों की पुनर्स्थापना और जल उपयोग पर कड़ी निगरानी की माँग की है। सभी पक्ष आशा करते हैं कि समन्वित कदमों से इस प्रजाति के विनाश को रोका जा सकेगा।
इस संकुचन के मुख्य कारण कृषि के लिए जल निकासी का बढ़ना, अनियंत्रित शहरी विस्तार और दलदल क्षेत्रों को कृषि भूमि में बदलना हैं। इन कारणों से पक्षी के भोजन और प्रजनन चक्र के लिए आवश्यक उथले जल क्षेत्रों की उपलब्धता कम हो गई है।
स्थानीय वन्यजीव समूहों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में प्रमुख जलस्थल क्षेत्रों में पलापिट्टा के देखे जाने की संख्या में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है। जबकि सटीक जनसंख्या आँकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, इस गिरावट ने त्वरित निगरानी की आवश्यकता को उजागर किया है।
प्राधिकरण और गैर‑सरकारी संगठनों ने शेष जलस्थलों की सुरक्षा, क्षतिग्रस्त आवासों की पुनर्स्थापना और जल उपयोग पर कड़ी निगरानी की माँग की है। सभी पक्ष आशा करते हैं कि समन्वित कदमों से इस प्रजाति के विनाश को रोका जा सकेगा।