📷 चित्र स्रोत: Indian Express (via NewsData)
राजनीति
शशि थारू ने कहा, भारत चीन से बातों में 'हार्डबॉल' खेलेगा
✍️ Indian Express
🗓 12 सित. 2026, 02:46 PM
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पूर्व मंत्री शशि थारू ने चेतावनी दी कि मोदी‑शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन से पहले भारत चीन के साथ बातचीत में सख्त रुख अपनाएगा।
पूर्व भारतीय मंत्री शशि थारू ने मोदी‑शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन से पहले चीन के साथ वार्ताओं में "हार्डबॉल" खेलने का इरादा जताया। यह टिप्पणी उन्होंने एक प्रेस ब्रीफिंग में दी, जहाँ उन्होंने भारत की प्रमुख द्विपक्षीय मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
थारू, जो पहले मंत्री के पद पर रहे हैं, ने जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण दृढ़ परंतु मापी हुई होगा, खासकर लद्दाख में सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसे मामलों पर। उन्होंने कहा कि सरकार अपने हितों के लिए दृढ़ रहने के साथ-साथ रचनात्मक संवाद में संलग्न होने के लिए तैयार है।
यह टिप्पणी दोनों देशों के उच्च‑स्तरीय बैठक के लिए तैयार होने के बीच आई है, जो भारत‑चीन संबंधों की दिशा तय कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि थारू का बयान भारतीय राजनीतिक परिदृश्य के भीतर व्यापक भावना को दर्शाता है कि भारत को निष्क्रिय साथी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हालाँकि शिखर सम्मेलन का विशिष्ट एजेंडा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है, थारू के बयानों से संकेत मिलता है कि भारत ज़रूरत पड़ने पर सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बैठक के परिणाम से व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भविष्य के सहयोग पर असर पड़ सकता है।
भारत के विदेश नीति अधिकारियों ने संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है जबकि अनावश्यक वृद्धि से बचना है। मोदी‑शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन में सीमा प्रबंधन से लेकर आर्थिक संबंधों तक के विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें दोनों नेता व्यावहारिक समाधान की खोज करेंगे।
थारू, जो पहले मंत्री के पद पर रहे हैं, ने जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण दृढ़ परंतु मापी हुई होगा, खासकर लद्दाख में सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसे मामलों पर। उन्होंने कहा कि सरकार अपने हितों के लिए दृढ़ रहने के साथ-साथ रचनात्मक संवाद में संलग्न होने के लिए तैयार है।
यह टिप्पणी दोनों देशों के उच्च‑स्तरीय बैठक के लिए तैयार होने के बीच आई है, जो भारत‑चीन संबंधों की दिशा तय कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि थारू का बयान भारतीय राजनीतिक परिदृश्य के भीतर व्यापक भावना को दर्शाता है कि भारत को निष्क्रिय साथी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हालाँकि शिखर सम्मेलन का विशिष्ट एजेंडा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है, थारू के बयानों से संकेत मिलता है कि भारत ज़रूरत पड़ने पर सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बैठक के परिणाम से व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भविष्य के सहयोग पर असर पड़ सकता है।
भारत के विदेश नीति अधिकारियों ने संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है जबकि अनावश्यक वृद्धि से बचना है। मोदी‑शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन में सीमा प्रबंधन से लेकर आर्थिक संबंधों तक के विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें दोनों नेता व्यावहारिक समाधान की खोज करेंगे।