📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Agriculture and Farmers' Welfare
कृषि
शरद पवार ने महाराष्ट्र के सीएम से सूखा घोषित करने और प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये सहायता की मांग की
✍️ mid-day.com
🗓 19 सित. 2026, 08:16 AM
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वृद्ध नेता शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से महाराष्ट्र में सूखा घोषित करने और किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की नकद सहायता देने का आग्रह किया।
महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में गंभीर जल तनाव है, कई जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही है और फसल उत्पादन घट रहा है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि लगातार कमी कई किसानों को आर्थिक संकट में धकेल सकती है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शरद पवार ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान दिया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से राज्य में सूखा घोषित करने का आग्रह किया। पवार ने कहा कि आधिकारिक घोषणा से केंद्र और राज्य दोनों के राहत तंत्र सक्रिय हो जाएंगे और प्रभावित किसानों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
पवार ने विशेष रूप से प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की नकद सहायता की माँग की, जिससे किसानों को पुनः बुवाई, सिंचाई और अन्य पुनरुद्धार उपायों में मदद मिल सके। उनका तर्क है कि यह लक्षित सहायता तत्काल वित्तीय झटके को कम करेगी और आगामी बुवाई मौसम से पहले ग्रामीण आय को स्थिर करने में सहायक होगी।
हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक स्थिति को सूखा घोषित नहीं किया है, क्योंकि उन्हें विस्तृत डेटा की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधिकारिक घोषणा से राष्ट्रीय योजनाओं के तहत अतिरिक्त मौसम‑राहत निधि सक्रिय हो सकती है, जिससे महाराष्ट्र के लाखों किसानों को लाभ पहुंचेगा।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शरद पवार ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान दिया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से राज्य में सूखा घोषित करने का आग्रह किया। पवार ने कहा कि आधिकारिक घोषणा से केंद्र और राज्य दोनों के राहत तंत्र सक्रिय हो जाएंगे और प्रभावित किसानों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
पवार ने विशेष रूप से प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की नकद सहायता की माँग की, जिससे किसानों को पुनः बुवाई, सिंचाई और अन्य पुनरुद्धार उपायों में मदद मिल सके। उनका तर्क है कि यह लक्षित सहायता तत्काल वित्तीय झटके को कम करेगी और आगामी बुवाई मौसम से पहले ग्रामीण आय को स्थिर करने में सहायक होगी।
हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक स्थिति को सूखा घोषित नहीं किया है, क्योंकि उन्हें विस्तृत डेटा की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधिकारिक घोषणा से राष्ट्रीय योजनाओं के तहत अतिरिक्त मौसम‑राहत निधि सक्रिय हो सकती है, जिससे महाराष्ट्र के लाखों किसानों को लाभ पहुंचेगा।