📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President Office, Government of India
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल में अनुबंध आरोपों की CBI जांच की निगरानी फिर शुरू की
✍️ India Legal
🗓 24 अग. 2026, 05:18 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में अनुबंध संबंधी आरोपों की CBI जांच, जिसमें मुख्यमंत्री पेमा खंडू के परिवार का नाम है, की निगरानी फिर से शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश में अनुबंध संबंधी आरोपों की CBI जांच की निगरानी को फिर से शुरू करने का आदेश दिया। यह मामला राज्य के अनुबंधों में संभावित पक्षपात के आरोपों पर केंद्रित है, जिनमें मुख्यमंत्री पेमा खंडू के परिवार के सदस्य शामिल हैं।
कोर्ट ने पहले एक निगरानी समिति स्थापित की थी ताकि CBI की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सके, लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण उसकी अवधि समाप्त हो गई थी। अब निगरानी तंत्र को पुनः सक्रिय करके, सर्वोच्च न्यायालय पारदर्शिता बनाए रखने और जांच पर किसी भी अनावश्यक प्रभाव को रोकने का लक्ष्य रखता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च‑स्तरीय राजनेताओं से जुड़ी भ्रष्टाचार जांचों में सुप्रीम कोर्ट की भागीदारी संवेदनशीलता को दर्शाती है। CBI अनुबंध प्रक्रियाओं की जांच जारी रखेगा, जबकि निगरानी समिति नियमित रूप से अपने निष्कर्ष कोर्ट को रिपोर्ट करेगी।
यह कदम राज्य में विपक्षी दलों की लगातार मांगों के बाद आया है, जिन्होंने कहा था कि अनुबंध बिना प्रतिस्पर्धी बोली के दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय राज्य सरकार पर जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करने का दबाव बढ़ा रहा है।
कोर्ट ने पहले एक निगरानी समिति स्थापित की थी ताकि CBI की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सके, लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण उसकी अवधि समाप्त हो गई थी। अब निगरानी तंत्र को पुनः सक्रिय करके, सर्वोच्च न्यायालय पारदर्शिता बनाए रखने और जांच पर किसी भी अनावश्यक प्रभाव को रोकने का लक्ष्य रखता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च‑स्तरीय राजनेताओं से जुड़ी भ्रष्टाचार जांचों में सुप्रीम कोर्ट की भागीदारी संवेदनशीलता को दर्शाती है। CBI अनुबंध प्रक्रियाओं की जांच जारी रखेगा, जबकि निगरानी समिति नियमित रूप से अपने निष्कर्ष कोर्ट को रिपोर्ट करेगी।
यह कदम राज्य में विपक्षी दलों की लगातार मांगों के बाद आया है, जिन्होंने कहा था कि अनुबंध बिना प्रतिस्पर्धी बोली के दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय राज्य सरकार पर जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करने का दबाव बढ़ा रहा है।