📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Madhurendra Kr
मनोरंजन
बिहार के सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने ब्रिक्स 2026 नेताओं की पत्तल पर चित्रकारी
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 12 सित. 2026, 09:48 PM
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बिहार के सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने ब्रिक्स 2026 में भाग लेने वाले नेताओं की पत्तल पर चित्र बनाकर 'Welcome to India‑BRICS 2026' संदेश के साथ शांति का संदेश दिया।
बिहार में स्थित प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन से पहले एक अनोखी पत्तल पर चित्रकला का अनावरण किया। इस बड़े पत्तल पर ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों सहित सभी भाग लेने वाले नेताओं की सटीक प्रतिकृतियां तैयार की गई हैं।
हर चित्र को बारीकी से रेत के महीन दानों से उकेरा गया है, जिससे चेहरे की विशेषताएँ और परिधान स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं। मध्य में "Welcome to India‑BRICS 2026" लिखा गया है, जिसके साथ शांति का प्रतीक भी दर्शाया गया है, जिससे कलाकार का विश्व शांति का संदेश स्पष्ट होता है।
स्थानीय अधिकारियों और सांस्कृतिक संगठनों ने इस कृति की सराहना की, इसे पारंपरिक रेत कला और समकालीन कूटनीतिक विषयों के संगम के रूप में बताया। शिखर सम्मेलन के आयोजकों ने इस कार्य को भारत की मेहमाननवाज़ी और वैश्विक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का रचनात्मक प्रतीक माना है।
हालांकि यह स्थापना अस्थायी है, कुमार ने इसे उच्च रेज़ोल्यूशन फ़ोटोग्राफ़ी से दस्तावेज़ करने और सोशल मीडिया पर साझा करने की योजना बनाई है, ताकि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत पहुँच सके।
यह रेत की चित्रकला इस बात की याद दिलाती है कि सांस्कृतिक पहलें कूटनीतिक संवाद को पूरक कर सकती हैं, और जैसे ही ब्रिक्स के नेता भारत में एकत्रित होंगे, एकता का यह दृश्य संदेश भी साथ ले जाएगा।
हर चित्र को बारीकी से रेत के महीन दानों से उकेरा गया है, जिससे चेहरे की विशेषताएँ और परिधान स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं। मध्य में "Welcome to India‑BRICS 2026" लिखा गया है, जिसके साथ शांति का प्रतीक भी दर्शाया गया है, जिससे कलाकार का विश्व शांति का संदेश स्पष्ट होता है।
स्थानीय अधिकारियों और सांस्कृतिक संगठनों ने इस कृति की सराहना की, इसे पारंपरिक रेत कला और समकालीन कूटनीतिक विषयों के संगम के रूप में बताया। शिखर सम्मेलन के आयोजकों ने इस कार्य को भारत की मेहमाननवाज़ी और वैश्विक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का रचनात्मक प्रतीक माना है।
हालांकि यह स्थापना अस्थायी है, कुमार ने इसे उच्च रेज़ोल्यूशन फ़ोटोग्राफ़ी से दस्तावेज़ करने और सोशल मीडिया पर साझा करने की योजना बनाई है, ताकि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत पहुँच सके।
यह रेत की चित्रकला इस बात की याद दिलाती है कि सांस्कृतिक पहलें कूटनीतिक संवाद को पूरक कर सकती हैं, और जैसे ही ब्रिक्स के नेता भारत में एकत्रित होंगे, एकता का यह दृश्य संदेश भी साथ ले जाएगा।