📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash Dwivedi
धर्म
इंदौर में 2 नवंबर से आरएसएस की 3‑दिवसीय कार्यकारी बैठक, संभागीय व्यवस्था पर चर्चा
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 31 अक्टू. 2026, 04:33 PM
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल 2 नवंबर से इंदौर में तीन दिन की बैठक करेगी, जिसमें प्रांत‑आधारित से संभागीय व्यवस्था में बदलाव और नई जिम्मेदारियों पर चर्चा होगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 2 नवंबर से इंदौर में आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह तीन दिवसीय सभा संघ की संगठनात्मक संरचना में बदलाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक में वरिष्ठ कार्यकारियों द्वारा वर्तमान प्रांत‑आधारित मॉडल को संभागीय (क्षेत्रीय) व्यवस्था में बदलने का प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इस परिवर्तन का उद्देश्य बड़े भौगोलिक क्षेत्रों में समन्वय को सुदृढ़ करना और संघ की विस्तृत गतिविधियों के साथ जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से जोड़ना है।
यदि यह योजना स्वीकृत होती है, तो नई जिम्मेदारियां क्षेत्रीय नेताओं को सौंपी जाएंगी, जिससे शाखाओं के संचालन और स्वयंसेवकों के संगठित करने के तरीके में बदलाव आ सकता है। इंदौर में लिए गए निर्णयों का प्रभाव पूरे देश में आरएसएस की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।
आरएसएस, जो भारत में व्यापक सामाजिक‑सांस्कृतिक नेटवर्क रखता है, ने चर्चा के विस्तृत बिंदु अभी तक सार्वजनिक नहीं किए हैं, यह कहा गया है कि यह आंतरिक deliberation है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के परिणामस्वरूप संबद्ध संगठनों और व्यापक सामाजिक‑राजनीतिक माहौल पर असर पड़ सकता है।
बैठक में वरिष्ठ कार्यकारियों द्वारा वर्तमान प्रांत‑आधारित मॉडल को संभागीय (क्षेत्रीय) व्यवस्था में बदलने का प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इस परिवर्तन का उद्देश्य बड़े भौगोलिक क्षेत्रों में समन्वय को सुदृढ़ करना और संघ की विस्तृत गतिविधियों के साथ जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से जोड़ना है।
यदि यह योजना स्वीकृत होती है, तो नई जिम्मेदारियां क्षेत्रीय नेताओं को सौंपी जाएंगी, जिससे शाखाओं के संचालन और स्वयंसेवकों के संगठित करने के तरीके में बदलाव आ सकता है। इंदौर में लिए गए निर्णयों का प्रभाव पूरे देश में आरएसएस की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।
आरएसएस, जो भारत में व्यापक सामाजिक‑सांस्कृतिक नेटवर्क रखता है, ने चर्चा के विस्तृत बिंदु अभी तक सार्वजनिक नहीं किए हैं, यह कहा गया है कि यह आंतरिक deliberation है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के परिणामस्वरूप संबद्ध संगठनों और व्यापक सामाजिक‑राजनीतिक माहौल पर असर पड़ सकता है।