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13 सित. 2026
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ब्रिक्स सम्मेलन के भोजन को लेकर विवाद: 'यह वैश्विक स्तर पर शाकाहारीवाद थोपना है'
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / 15th BRICS SUMMIT
खानपान

ब्रिक्स सम्मेलन के भोजन को लेकर विवाद: 'यह वैश्विक स्तर पर शाकाहारीवाद थोपना है'

✍️ NDTV 🗓 13 सित. 2026, 07:22 PM 👁 6
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ब्रिक्स सम्मेलन में परोसे गए केवल शाकाहारी भोजन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि यह भारत की विविधतापूर्ण खान-पान संस्कृति का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता, जहाँ गैर-शाकाहारी खाना भी महत्वपूर्ण है।

हाल ही में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के भोजन व्यवस्थाओं को लेकर एक बहस छिड़ गई है, जिसमें केवल शाकाहारी मेन्यू परोसे जाने का फैसला प्रमुख विषय बना। शाकाहारीवाद को बढ़ावा देने की नीयत पर सभी का आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका अमल ऐसे तरीके से किया गया है जिसकी आलोचना की जा रही है।

आलोचकों का कहना है कि भारत की खान-पान संस्कृति को केवल शाकाहारी व्यंजनों तक सीमित करना गलत है। उनका तर्क है कि देश में करोड़ों लोग गैर-शाकाहारी भोजन खाते हैं और मटन, चिकन और मछली भारतीय रसोई की विविधता का एक अहम हिस्सा हैं।

इस बहस का मुख्य मुद्दा यह है कि भारत शाकाहारीवाद को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन इससे अपनी खान-पान संस्कृति की पहचान को एक ही श्रेणी में कैद नहीं करना चाहिए। भारतीय भोजन संस्कृति व्यापक है और इसमें शाकाहारी व गैर-शाकाहारी दोनों परंपराओं को समान महत्व दिया जाता है।

यह घटना यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रतीकों को कैसे प्रस्तुत किया जाए, इससे जुड़ी संवेदनशीलता अभी भी बना हुआ है।
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