📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Wikimedia Commons
विज्ञान
सेवानिवृत्त राजस्थान प्रोफ़ेसर ने भौतिकी में कविता को जोड़ा
✍️ Hindustan Times
🗓 26 अग. 2026, 05:18 PM
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राजस्थान के सेवानिवृत्त भौतिकी प्रोफ़ेसर ने वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझाने के लिए कविता लिखना शुरू किया, जिससे भौतिकी को आम जनता तक पहुँचाना चाहते हैं।
राजस्थान के एक सेवानिवृत्त भौतिकी प्रोफ़ेसर ने अब विज्ञान को समझाने के लिए कविता का सहारा लिया है। कई दशकों तक राज्य विश्वविद्यालय में पढ़ाते रहने वाले इस शिक्षाविद का मानना है कि लयबद्ध शब्द जटिल समीकरणों को सरल बनाते हैं।
उन्होंने क्वांटम यांत्रिकी, सापेक्षता और ऊष्मागतिकी जैसे सिद्धांतों को रोज़मर्रा की भाषा में ढालते हुए छोटे‑छोटे कविताएँ लिखना शुरू किया है। प्रत्येक कविता में वैज्ञानिक व्याख्या को रूपकात्मक छवि के साथ जोड़ा गया है, जिससे छात्रों और आम जनता दोनों की जिज्ञासा बढ़े।
शैक्षणिक जगत और सोशल मीडिया से मिली शुरुआती प्रतिक्रियाएँ सकारात्मक रही हैं। कई शिक्षकों ने इसे कक्षा में अतिरिक्त सामग्री के रूप में अपनाने की संभावना जताई, जबकि पाठकों ने विज्ञान को मानवीय स्वर में प्रस्तुत करने की सराहना की।
प्रोफ़ेसर इन कविताओं को द्विभाषी संग्रह के रूप में प्रकाशित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे भारतीय शिक्षा में अंतरविषयक रचनात्मकता को बढ़ावा मिले।
उन्होंने क्वांटम यांत्रिकी, सापेक्षता और ऊष्मागतिकी जैसे सिद्धांतों को रोज़मर्रा की भाषा में ढालते हुए छोटे‑छोटे कविताएँ लिखना शुरू किया है। प्रत्येक कविता में वैज्ञानिक व्याख्या को रूपकात्मक छवि के साथ जोड़ा गया है, जिससे छात्रों और आम जनता दोनों की जिज्ञासा बढ़े।
शैक्षणिक जगत और सोशल मीडिया से मिली शुरुआती प्रतिक्रियाएँ सकारात्मक रही हैं। कई शिक्षकों ने इसे कक्षा में अतिरिक्त सामग्री के रूप में अपनाने की संभावना जताई, जबकि पाठकों ने विज्ञान को मानवीय स्वर में प्रस्तुत करने की सराहना की।
प्रोफ़ेसर इन कविताओं को द्विभाषी संग्रह के रूप में प्रकाशित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे भारतीय शिक्षा में अंतरविषयक रचनात्मकता को बढ़ावा मिले।