📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
नौकरी
रवीना ने बताया 36‑घंटे की कार्यशैली, कामकाजी संस्कृति पर चर्चा
✍️ Bangalore Mirror
🗓 25 सित. 2026, 07:02 AM
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अभिनेत्री रवीना ने बताया कि वह नियमित रूप से 36‑घंटे काम करती हैं, जिससे काम की तीव्रता पर सवाल उठे हैं।
बेंगलुरु – बेंगलुरु मिरर के साथ एक हालिया साक्षात्कार में अभिनेत्री रवीना ने बताया कि वह अपने प्रोजेक्ट्स की माँगों को पूरा करने के लिए अक्सर 36‑घंटे काम करती हैं। उन्होंने कहा कि कड़े शूटिंग शेड्यूल और उच्च‑गुणवत्ता वाले प्रदर्शन देने की आवश्यकता के कारण यह समय‑सारिणी बनती है।
रवीना ने इस समय‑सारिणी के कारण व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले दबाव को स्वीकार किया, पर यह भी कहा कि यह उद्योग में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अस्थायी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम भी समान रूप से लंबे शिफ्ट में काम करती है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस खुलासे से भारतीय मनोरंजन जगत में बढ़ते थकाऊ कार्य पैटर्न का संकेत मिलता है, जहाँ लंबे घंटे आम हो रहे हैं। निरंतर 36‑घंटे के कार्य से स्वास्थ्य और कार्य‑जीवन संतुलन पर प्रश्न उठते हैं, इसलिए उत्पादन कंपनियों को अधिक टिकाऊ शेड्यूल अपनाने की सलाह दी जा रही है।
अभिनेत्री ने अपने साथियों से कल्याण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, जबकि कलात्मक उत्कृष्टता की कोशिश जारी रखी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी ईमानदारी से स्वस्थ कार्य प्रथाओं पर संवाद शुरू होगा।
यह कहानी विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के साथ गूँज रही है, जिससे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था में कार्य घंटे की सीमा पर चर्चा बढ़ी है।
रवीना ने इस समय‑सारिणी के कारण व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले दबाव को स्वीकार किया, पर यह भी कहा कि यह उद्योग में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अस्थायी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम भी समान रूप से लंबे शिफ्ट में काम करती है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस खुलासे से भारतीय मनोरंजन जगत में बढ़ते थकाऊ कार्य पैटर्न का संकेत मिलता है, जहाँ लंबे घंटे आम हो रहे हैं। निरंतर 36‑घंटे के कार्य से स्वास्थ्य और कार्य‑जीवन संतुलन पर प्रश्न उठते हैं, इसलिए उत्पादन कंपनियों को अधिक टिकाऊ शेड्यूल अपनाने की सलाह दी जा रही है।
अभिनेत्री ने अपने साथियों से कल्याण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, जबकि कलात्मक उत्कृष्टता की कोशिश जारी रखी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी ईमानदारी से स्वस्थ कार्य प्रथाओं पर संवाद शुरू होगा।
यह कहानी विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के साथ गूँज रही है, जिससे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था में कार्य घंटे की सीमा पर चर्चा बढ़ी है।