📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Azonesa
राजनीति
राजस्थान में एससी‑एसटी निकायों ने क्रीमी लेयर को बाहर करने की मांग, 4 जातियों ने कोटा पर हावी
✍️ The Indian Express
🗓 30 अग. 2026, 07:03 PM
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राजस्थान के एससी‑एसटी आयोग ने कोटा से क्रीमी लेयर को बाहर करने की मांग की, क्योंकि 59 में से 4 जातियों ने कोटा पर हावी हो गई हैं।
राजस्थान के अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आयोग ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि आरक्षण लाभों से "क्रीमी लेयर" – अर्थात् आर्थिक रूप से उन्नत वर्गों को बाहर रखा जाए। क्रीमी लेयर नियम का उद्देश्य सबसे वंचित वर्गों को शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में सीटें सुनिश्चित करना है, परन्तु अब यह नियम राज्य में बहस का विषय बन गया है।
हाल ही में आयोग ने एक प्रस्तुति में बताया कि 59 मान्य जातियों में से केवल चार जातियों ने आरक्षण कोटा का असमान रूप से अधिक हिस्सा ले लिया है। सरकार को प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट है कि ये चार समूह कोटा को अपने हाथ में कर रहे हैं, जिससे अन्य पिछड़े वर्गों को सीमित अवसर मिल रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि क्रीमी लेयर मानदंड को सख्त करने से आर्थिक रूप से बेहतर स्थितियों वाले व्यक्तियों का कोटा पर हावी होना रोका जा सकेगा और सभी योग्य एससी‑एसटी समुदायों में लाभ का अधिक समान वितरण हो सकेगा। उन्होंने आगामी प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया से पहले मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा एवं संशोधन का अनुरोध किया है।
राज्य सरकार ने इस प्रस्तुति की प्राप्ति की पुष्टि की है और बताया कि इस मुद्दे को आगामी नीति समीक्षा समिति में चर्चा की जाएगी। यदि लागू किया गया, तो यह कदम राजस्थान में आरक्षण प्रणाली को पुनः आकार देगा, जिससे ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों को अधिक अवसर मिल सकेंगे।
हाल ही में आयोग ने एक प्रस्तुति में बताया कि 59 मान्य जातियों में से केवल चार जातियों ने आरक्षण कोटा का असमान रूप से अधिक हिस्सा ले लिया है। सरकार को प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट है कि ये चार समूह कोटा को अपने हाथ में कर रहे हैं, जिससे अन्य पिछड़े वर्गों को सीमित अवसर मिल रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि क्रीमी लेयर मानदंड को सख्त करने से आर्थिक रूप से बेहतर स्थितियों वाले व्यक्तियों का कोटा पर हावी होना रोका जा सकेगा और सभी योग्य एससी‑एसटी समुदायों में लाभ का अधिक समान वितरण हो सकेगा। उन्होंने आगामी प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया से पहले मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा एवं संशोधन का अनुरोध किया है।
राज्य सरकार ने इस प्रस्तुति की प्राप्ति की पुष्टि की है और बताया कि इस मुद्दे को आगामी नीति समीक्षा समिति में चर्चा की जाएगी। यदि लागू किया गया, तो यह कदम राजस्थान में आरक्षण प्रणाली को पुनः आकार देगा, जिससे ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों को अधिक अवसर मिल सकेंगे।