📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / urbzoo
धर्म
राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए को जयपुर की नूरानी मस्जिद विध्वंस पर नोटिस जारी किया
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 25 सित. 2026, 08:31 AM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण और अन्य पक्षों को नूरानी मस्जिद‑मदरसा के विध्वंस मामले में नोटिस भेजा, जबकि वक्फ बोर्ड ने पूर्व सूचना न मिलने का आरोप लगाया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नूरानी मस्जिद‑मदरसा के विध्वंस संबंधी नोटिस जारी किया। कोर्ट ने आठ हफ्तों के भीतर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया, जिसमें विध्वंस से पहले उठाए गए प्रक्रियात्मक कदमों की व्याख्या मांगी गई है।
वक्फ बोर्ड ने कहा कि इस ऐतिहासिक मस्जिद को बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के ध्वस्त किया गया, जो धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन है। बोर्ड ने कोर्ट से हस्तक्षेप कर वर्तमान स्थिति को बहाल करने की मांग की है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह कदम वक्फ अधिनियम और धरोहर संरक्षण नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। मामले की सुनवाई अभी लंबित है, और कोर्ट सबमिशन की समीक्षा के बाद आगे के कदम तय करेगा।
स्थानीय समुदाय और नागरिक समाज के समूहों ने इस मामले पर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि बिना जांच के विध्वंस अन्य धार्मिक स्थलों के लिए नकारात्मक मिसाल स्थापित कर सकता है। अधिकारियों ने कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया है।
आठ‑हफ्ते की अवधि समाप्त होने के बाद अगली सुनवाई निर्धारित की गई है, जहाँ कोर्ट यह तय करेगा कि कोई कानूनी उल्लंघन हुआ है या नहीं और प्रभावित पक्षों को उचित राहत प्रदान करेगा।
वक्फ बोर्ड ने कहा कि इस ऐतिहासिक मस्जिद को बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के ध्वस्त किया गया, जो धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन है। बोर्ड ने कोर्ट से हस्तक्षेप कर वर्तमान स्थिति को बहाल करने की मांग की है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह कदम वक्फ अधिनियम और धरोहर संरक्षण नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। मामले की सुनवाई अभी लंबित है, और कोर्ट सबमिशन की समीक्षा के बाद आगे के कदम तय करेगा।
स्थानीय समुदाय और नागरिक समाज के समूहों ने इस मामले पर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि बिना जांच के विध्वंस अन्य धार्मिक स्थलों के लिए नकारात्मक मिसाल स्थापित कर सकता है। अधिकारियों ने कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया है।
आठ‑हफ्ते की अवधि समाप्त होने के बाद अगली सुनवाई निर्धारित की गई है, जहाँ कोर्ट यह तय करेगा कि कोई कानूनी उल्लंघन हुआ है या नहीं और प्रभावित पक्षों को उचित राहत प्रदान करेगा।