📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / DubhEire
नौकरी
राजस्थान उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल को 9 सितंबर तक वकीलों की लंबित पंजीकरण समाप्त करने का आदेश
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 05 सित. 2026, 03:48 PM
👁 10
राजस्थान उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को सभी लंबित वकील पंजीकरण आवेदनों को 9 सितंबर तक निपटाने का निर्देश दिया।
जयपुर, 5 सितंबर – राजस्थान उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को सभी लंबित वकील पंजीकरण आवेदनों को 9 सितंबर तक निपटाने का आदेश दिया। यह आदेश एक नियमित सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें राज्य में वकीलों की पंजीकरण प्रक्रिया में देरी को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
न्यायालय ने कहा कि पंजीकरण में देरी से इच्छुक वकीलों को अभ्यास करने में बाधा आती है और यह राजस्थान के न्यायालयों के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करके, उच्च न्यायालय का उद्देश्य है कि पात्र उम्मीदवारों को उनके पंजीकरण प्रमाणपत्र शीघ्र मिलें।
बार काउंसिल ने आदेश को स्वीकार किया है और बताया है कि वे अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात करके और सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाकर 9 सितंबर की समय सीमा पूरी करेंगे। यद्यपि लंबित आवेदनों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई, यह निर्देश कानूनी समुदाय की पुरानी शिकायतों को दूर करने की दिशा में एक तेज़ प्रशासनिक प्रतिक्रिया दर्शाता है।
यदि बार काउंसिल इस आदेश का पालन नहीं करता, तो न्यायालय आगे की कार्रवाई, जिसमें अवमानना के मुकदमे भी शामिल हो सकते हैं, का संकेत दे चुका है। यह कदम न्यायिक प्रणाली में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
न्यायालय ने कहा कि पंजीकरण में देरी से इच्छुक वकीलों को अभ्यास करने में बाधा आती है और यह राजस्थान के न्यायालयों के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करके, उच्च न्यायालय का उद्देश्य है कि पात्र उम्मीदवारों को उनके पंजीकरण प्रमाणपत्र शीघ्र मिलें।
बार काउंसिल ने आदेश को स्वीकार किया है और बताया है कि वे अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात करके और सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाकर 9 सितंबर की समय सीमा पूरी करेंगे। यद्यपि लंबित आवेदनों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई, यह निर्देश कानूनी समुदाय की पुरानी शिकायतों को दूर करने की दिशा में एक तेज़ प्रशासनिक प्रतिक्रिया दर्शाता है।
यदि बार काउंसिल इस आदेश का पालन नहीं करता, तो न्यायालय आगे की कार्रवाई, जिसमें अवमानना के मुकदमे भी शामिल हो सकते हैं, का संकेत दे चुका है। यह कदम न्यायिक प्रणाली में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।