📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anil thakur chairman
राजनीति
पंजाब मंत्री ने दिल्ली के प्रदूषण आरोपों को उलटा, हरियाणा पर सवाल
✍️ NDTV
🗓 07 नव. 2026, 12:46 AM
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जब दिल्ली ने अपने धुंध के लिए पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहराया, तो पंजाब मंत्री ने कहा, “हरियाणा का क्या?" इस टिप्पणी से वायु‑गुणवत्ता के मुद्दे पर राज्य‑स्तर के तनाव स्पष्ट होते हैं।
दिल्ली के पर्यावरण विभाग ने कई बार कहा है कि आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषक राजधानी की सर्दियों की धुंध को बढ़ाते हैं। इस पर पंजाब के एक वरिष्ठ मंत्री ने मीडिया में कहा, “हरियाणा का क्या?” यह टिप्पणी एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान की गई, जहाँ उन्होंने बताया कि वायु‑गुणवत्ता का प्रबंधन सभी पड़ोसी राज्यों की साझा जिम्मेदारी है।
पंजाब के मंत्री ने हरियाणा के उत्सर्जन पर कोई विशिष्ट आँकड़ा नहीं दिया, पर यह संकेत दिया कि केवल पंजाब को ही दोषी ठहराना ग़लत होगा। उन्होंने एक समन्वित दृष्टिकोण की मांग की, जिसमें क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी और औद्योगिक तथा कृषि जलाने के नियमों का कड़ा पालन शामिल हो।
दिल्ली के अधिकारियों ने पहले ही पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाने को धुंध के प्रमुख कारणों में गिना है। मंत्री की इस प्रतिक्रिया से इस मुद्दे पर राजनीतिक संवेदनशीलता स्पष्ट होती है, क्योंकि राज्यों को जिम्मेदारी बाँटने और वायु‑गुणवत्ता सुधार के लिए सहयोगी उपाय खोजने की आवश्यकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि राज्यों के बीच विवाद अक्सर ठोस कार्रवाई में देरी करते हैं, और वे एकीकृत कार्यदल की सिफारिश करते हैं जो मौसमी कण पदार्थ के स्तर को नियंत्रित करे। सर्दियों के मौसम के निकट आने के साथ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के बीच संवाद जारी रहने की संभावना है।
पंजाब के मंत्री ने हरियाणा के उत्सर्जन पर कोई विशिष्ट आँकड़ा नहीं दिया, पर यह संकेत दिया कि केवल पंजाब को ही दोषी ठहराना ग़लत होगा। उन्होंने एक समन्वित दृष्टिकोण की मांग की, जिसमें क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी और औद्योगिक तथा कृषि जलाने के नियमों का कड़ा पालन शामिल हो।
दिल्ली के अधिकारियों ने पहले ही पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाने को धुंध के प्रमुख कारणों में गिना है। मंत्री की इस प्रतिक्रिया से इस मुद्दे पर राजनीतिक संवेदनशीलता स्पष्ट होती है, क्योंकि राज्यों को जिम्मेदारी बाँटने और वायु‑गुणवत्ता सुधार के लिए सहयोगी उपाय खोजने की आवश्यकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि राज्यों के बीच विवाद अक्सर ठोस कार्रवाई में देरी करते हैं, और वे एकीकृत कार्यदल की सिफारिश करते हैं जो मौसमी कण पदार्थ के स्तर को नियंत्रित करे। सर्दियों के मौसम के निकट आने के साथ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के बीच संवाद जारी रहने की संभावना है।