📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dublinsantosh
देश
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों में खनन लीज़ पर रिपोर्ट का आदेश दिया
✍️ Live Law
🗓 04 नव. 2026, 01:32 PM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील अरावली पहाड़ियों में जारी खनन लीज़ पर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया, संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ में सुनवाई के दौरान अरावली पहाड़ियों में खनन लीज़ के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस श्रृंखला की पारिस्थितिक महत्ता को रेखांकित किया, जो कई राज्यों में फैली एक महत्वपूर्ण हरित पट्टी है।
पर्यावरण संगठनों की बढ़ती चिंताओं के बीच यह आदेश आया है कि अनियंत्रित खनन से जलभरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है। बेंच ने रिपोर्ट में लीज़ की शर्तें, पर्यावरणीय मंजूरी की पूर्ति और किए गए प्रभाव आकलन की जानकारी शामिल करने को कहा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखा जाए, जिसके बाद लीज़ के संभावित निलंबन या अन्य सुधारात्मक कदमों पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों को शीघ्र प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया है ताकि कानूनी परिणामों से बचा जा सके।
स्थानीय समुदाय और एनजीओ सहित कई हितधारकों ने न्यायिक हस्तक्षेप का स्वागत किया है, इसे पहाड़ियों को अपरिवर्तनीय क्षति से बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानते हुए। यह निर्णय खनन गतिविधियों में पर्यावरणीय सुरक्षा को लागू करने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष भविष्य में संवेदनशील क्षेत्रों में खनन नीतियों को आकार देंगे और देश भर में कड़े पर्यावरणीय निरीक्षण के लिए एक मिसाल स्थापित करेंगे।
पर्यावरण संगठनों की बढ़ती चिंताओं के बीच यह आदेश आया है कि अनियंत्रित खनन से जलभरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है। बेंच ने रिपोर्ट में लीज़ की शर्तें, पर्यावरणीय मंजूरी की पूर्ति और किए गए प्रभाव आकलन की जानकारी शामिल करने को कहा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखा जाए, जिसके बाद लीज़ के संभावित निलंबन या अन्य सुधारात्मक कदमों पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों को शीघ्र प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया है ताकि कानूनी परिणामों से बचा जा सके।
स्थानीय समुदाय और एनजीओ सहित कई हितधारकों ने न्यायिक हस्तक्षेप का स्वागत किया है, इसे पहाड़ियों को अपरिवर्तनीय क्षति से बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानते हुए। यह निर्णय खनन गतिविधियों में पर्यावरणीय सुरक्षा को लागू करने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष भविष्य में संवेदनशील क्षेत्रों में खनन नीतियों को आकार देंगे और देश भर में कड़े पर्यावरणीय निरीक्षण के लिए एक मिसाल स्थापित करेंगे।