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07 नव. 2026•
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सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को संसाधन बढ़ाने हेतु फंडरेज़िंग में निपुण होना चाहिए
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Artyom Svetlov
शिक्षा

सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को संसाधन बढ़ाने हेतु फंडरेज़िंग में निपुण होना चाहिए

✍️ ThePrint 🗓 07 नव. 2026, 10:49 AM 👁 11
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ThePrint का मानना है कि भारत के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को फंडरेज़िंग के माध्यम से वित्तीय अंतर को पाटना और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारनी चाहिए।

भारत के सार्वजनिक विश्वविद्यालय लगातार बजट की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे शोध, बुनियादी ढांचा और छात्र सेवाओं पर असर पड़ रहा है। ThePrint के एक लेख में कहा गया है कि केवल सरकारी आवंटन पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है और विश्वविद्यालयों को व्यवस्थित फंडरेज़िंग अपनानी चाहिए। यह सुझाव देता है कि पूर्व छात्र नेटवर्क, कॉरपोरेट साझेदारी, शोध अनुदान और अंतःप्रायोजन स्थायी, गैर‑सरकारी आय स्रोत बन सकते हैं। विकास कार्यालयों को पेशेवर बनाकर और दाता संपर्क में प्रशिक्षण देकर, सार्वजनिक विश्वविद्यालय आय में विविधता ला सकते हैं और अस्थिर राज्य बजट पर निर्भरता घटा सकते हैं। यह लेख नीति समर्थन और सांस्कृतिक बदलाव की मांग करता है ताकि फंडरेज़िंग विश्वविद्यालय प्रबंधन का नियमित हिस्सा बन सके।
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