📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jagtapkish
अपराध
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर बांध में पुलिस ने छुपे 6,000 लीटर अवैध महुआ शराब को बरामद किया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 30 अक्टू. 2026, 10:33 PM
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मांधाता पुलिस ने गोताखोरों की मदद से ओंकारेश्वर बांध के बैकवॉटर में तीन अवैध शराब के अड्डे दबाए और 40‑45 ड्रमों में लगभग छह हजार लीटर महुआ शराब बरामद की।
खंडवा जिले के ओंकारेश्वर बांध के बैकवॉटर में स्थित तीन अवैध शराब निर्माण अड्डों पर मांधाता पुलिस ने दबिश दी। गोताखोरों की सहायता से पानी में छिपे 40‑45 ड्रम बरामद किए गए, जिनमें लगभग छह हजार लीटर महुआ लहान शराब थी।
ऑपरेशन के दौरान कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और पूरी शराब की मात्रा जब्त की गई। पुलिस ने बताया कि यह शराब बिना लाइसेंस के निर्मित थी और बांध के जल में छुपाकर वितरण किया जा रहा था।
अवैध शराब उत्पादन को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है, क्योंकि ऐसी शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है और राज्य की आय में कटौती करती है। आगे की जाँच में इस नेटवर्क की आपूर्ति श्रृंखला और अन्य संभावित छिपे हुए अड्डों की पहचान की जाएगी।
जबरदस्त मात्रा में बरामद हुई महुआ शराब को पुलिस की निगरानी में नष्ट किया जाएगा, जबकि जब्त उपकरण को सबूत के रूप में रखा गया है। जनता से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसे किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
यह घटना जलाशयों और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी अवैध गतिविधियों की निगरानी में पुलिस को मिलने वाली चुनौतियों को उजागर करती है, विशेषकर ओंकारेश्वर जैसे बड़े जलस्रोतों के आसपास।
ऑपरेशन के दौरान कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और पूरी शराब की मात्रा जब्त की गई। पुलिस ने बताया कि यह शराब बिना लाइसेंस के निर्मित थी और बांध के जल में छुपाकर वितरण किया जा रहा था।
अवैध शराब उत्पादन को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है, क्योंकि ऐसी शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है और राज्य की आय में कटौती करती है। आगे की जाँच में इस नेटवर्क की आपूर्ति श्रृंखला और अन्य संभावित छिपे हुए अड्डों की पहचान की जाएगी।
जबरदस्त मात्रा में बरामद हुई महुआ शराब को पुलिस की निगरानी में नष्ट किया जाएगा, जबकि जब्त उपकरण को सबूत के रूप में रखा गया है। जनता से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसे किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
यह घटना जलाशयों और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी अवैध गतिविधियों की निगरानी में पुलिस को मिलने वाली चुनौतियों को उजागर करती है, विशेषकर ओंकारेश्वर जैसे बड़े जलस्रोतों के आसपास।