📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
राजनीति
पेटीशनर: पद छोड़ने के बाद राष्ट्रपति पर मुकदमा हो सकता है, लेकिन चुनाव आयोग के सदस्यों पर नहीं
✍️ TOI India
🗓 05 नव. 2026, 06:46 AM
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एक कानूनी पेटीशनर ने तर्क दिया है कि भारत के राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है, लेकिन चुनाव आयोग के सदस्यों के खिलाफ ऐसा नहीं किया जा सकता।
भारत में उच्च स्तरीय संवैधानिक पदों के धारकों के खिलाफ मुकदमे की सीमाओं के संबंध में एक पेटीशनर ने कानूनी प्रक्रिया में तर्क प्रस्तुत किए हैं। इस तर्क का मुख्य बिंदु राष्ट्रपति और चुनाव आयोग के सदस्यों के कानूनी स्थिति में अंतर को रेखांकित करता है।
पेटीशनर के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति के कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। यह दलीली सामान्य संवैधानिक समझ के अनुरूप है, जिसके तहत राष्ट्रपति केवल पद पर रहते समय अपने आधिकारिक कार्य के लिए प्रतिरक्षा का लाभ उठाते हैं।
इसके विपरीत, पेटीशनर ने दावा किया है कि चुनाव आयोग के सदस्यों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं दर्ज किया जा सकता। यह दलीली राष्ट्र के प्रशासनिक प्रमुख और चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र विनियामक निकायों के प्रमुखों के बीच एक विशिष्ट कानूनी अंतर पर प्रकाश डालती है।
वर्तमान में यह मामला न्यायिक विचार के अधीन है, जहाँ पेटीशनर इन विशिष्ट संवैधानिक पदों की मुकदमे की योग्यता पर एक निर्णायक कानूनी व्याख्या चाह रहा है।
पेटीशनर के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति के कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। यह दलीली सामान्य संवैधानिक समझ के अनुरूप है, जिसके तहत राष्ट्रपति केवल पद पर रहते समय अपने आधिकारिक कार्य के लिए प्रतिरक्षा का लाभ उठाते हैं।
इसके विपरीत, पेटीशनर ने दावा किया है कि चुनाव आयोग के सदस्यों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं दर्ज किया जा सकता। यह दलीली राष्ट्र के प्रशासनिक प्रमुख और चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र विनियामक निकायों के प्रमुखों के बीच एक विशिष्ट कानूनी अंतर पर प्रकाश डालती है।
वर्तमान में यह मामला न्यायिक विचार के अधीन है, जहाँ पेटीशनर इन विशिष्ट संवैधानिक पदों की मुकदमे की योग्यता पर एक निर्णायक कानूनी व्याख्या चाह रहा है।