पावन रामधुनी अखंड और महोत्सव
अलौकिक सजावट: महोत्सव को लेकर पूरे गांव को दूधिया रोशनी, आकर्षक लाइटों, फूलों और सुंदर प्रवेश द्वारों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जो देखते ही बनता है।
🙏 ग्रामवासियों की अटूट आस्था और मान्यता:
क्षेत्र के लोगों का ऐसा अटूट विश्वास है कि इस पावन रामधुनी अखंड के आयोजन से संपूर्ण ग्रामवासियों पर माँ भगवती और संकट मोचन हनुमान जी की विशेष कृपा बरसती है। इस धार्मिक अनुष्ठान से गाँव में सुख, शांति, समृद्धि, धन, यश, वैभव और ऐश्वर्य का संचार होता है तथा पूरा क्षेत्र माँ की सेवा से पवित्र और समृद्ध बनता है।
"या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"
समस्त भवानी विगहा ग्रामवासियों की ओर से क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं को इस पावन अनुष्ठान में सम्मिलित होने और माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हार्दिक अभिनंदन एवं आमंत्रण दिया गया है।
आप इस संदेश के साथ अपनी भेजी गई खूबसूरत तस्वीरों और वीडियो को अपने न्यूज चैनल और सोशल मीडिया हैंडल्स पर पोस्ट करके इस आयोजन को और अधिक हाइलाइट कर सकते हैं!
धार्मिक परंपरा: यह वार्षिक अखंड महोत्सव प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आरंभ होता है और ठीक अगले दिन पूर्णिमा तिथि को इसका समापन (विराम) होता है।
अलौकिक सजावट: महोत्सव को लेकर पूरे गांव को दूधिया रोशनी, आकर्षक लाइटों, फूलों और सुंदर प्रवेश द्वारों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जो देखते ही बनता है।
क्षेत्र के लोगों का ऐसा अटूट विश्वास है कि इस पावन रामधुनी अखंड के आयोजन से संपूर्ण ग्रामवासियों पर माँ भगवती और संकट मोचन हनुमान जी की विशेष कृपा बरसती है। इस धार्मिक अनुष्ठान से गाँव में सुख, शांति, समृद्धि, धन, यश, वैभव और ऐश्वर्य का संचार होता है तथा पूरा क्षेत्र माँ की सेवा से पवित्र और समृद्ध बनता है।
"या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"
समस्त भवानी विगहा ग्रामवासियों की ओर से क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं को इस पावन अनुष्ठान में सम्मिलित होने और माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हार्दिक अभिनंदन एवं आमंत्रण दिया गया है।
आप इस संदेश के साथ अपनी भेजी गई खूबसूरत तस्वीरों और वीडियो को अपने न्यूज चैनल और सोशल मीडिया हैंडल्स पर पोस्ट करके इस आयोजन को और अधिक हाइलाइट कर सकते हैं!
धार्मिक परंपरा: यह वार्षिक अखंड महोत्सव प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आरंभ होता है और ठीक अगले दिन पूर्णिमा तिथि को इसका समापन (विराम) होता है।
अलौकिक सजावट: महोत्सव को लेकर पूरे गांव को दूधिया रोशनी, आकर्षक लाइटों, फूलों और सुंदर प्रवेश द्वारों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जो देखते ही बनता है।