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25 अग. 2026
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स्वास्थ्य

पटना एम्स ने लिम्का रिकॉर्ड अपना नाम दर्ज करवाया

✍️ रिपोर्टर: Awanish Kumar 🗓 25 अग. 2026, 06:10 PM 👁 8
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एडवांस एंडोपिक स्पाइन सर्जरी में पटना एम्स का रिकॉर्डपांच या उससे अधिक लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड उपलब्धियांहासिल करनेवाला देश बना

पटना एम्स से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

एडवांस्ड एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में एम्स पटना का रिकॉर्ड, पाँच या उससे अधिक लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स उपलब्धियाँ हासिल करने वाला बना देश का पहला संस्थान

पटना, 25 अगस्त 2026

जहां सर्जरी का चीरा महज 1.5-2 सेंटीमीटर था वहीं उपलब्धि 8 सेंटीमीटर की थी। एडवांस्ड एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में एम्स पटना ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने अत्याधुनिक न्यूरोसर्जरी में संस्थान की पहचान को नई ऊंचाई दी है। एम्स पटना में 8 सेंटीमीटर की विशाल हर्नियेटेड डिस्क को एक ही टुकड़े में सफलतापूर्वक निकालने की इस जटिल सर्जरी को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया है।
यह ऐतिहासिक प्रक्रिया एम्स पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सरज कुमार सिंह के नेतृत्व में अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक से की गई। इस उपलब्धि के साथ एम्स पटना इस तरह की एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने वाला देश का पहला संस्थान बन गया है।
बिहार पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत मरीज की सर्जरी में केवल 1.52 सेंटीमीटर का चीरा लगाया गया। विशेष एंडोस्कोप के माध्यम से मांसपेशियों को सुरक्षित रखते हुए प्रभावित हिस्से तक पहुंच बनाई गई। आवश्यक हड्डी को सावधानीपूर्वक ड्रिल करने के बाद नसों और डिस्क की पहचान की गई। नसों को सुरक्षित रखते हुए पूरी 8 सेंटीमीटर लंबी डिस्क को एक ही टुकड़े में बाहर निकाला गया। इस दौरान रक्तस्राव बेहद कम हुआ और आसपास के ऊतकों को भी न्यूनतम नुकसान पहुंचा।
डॉ. सरज कुमार सिंह ने बताया कि एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी आधुनिक स्पाइन सर्जरी की अत्याधुनिक तकनीकों में से एक है। इसमें बहुत छोटे चीरे से रीढ़ तक पहुंच बनाई जाती है जिससे मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों को अधिकतम सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे रक्तस्राव, ऑपरेशन के बाद का दर्द और रिकवरी का समय कम करने में मदद मिलती है।
यह उपलब्धि डॉ. सरज कुमार सिंह और एम्स पटना की न्यूरोसर्जिकल उपलब्धियों की लंबी श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। इससे पहले डॉ. सरज कुमार सिंह ने 2.280 किलोग्राम (2,280 ग्राम) वजन के मस्तिष्क ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा उन्होंने रीढ़ से सबसे लंबे फॉरेन बॉडी, सबसे बड़े स्कल बोन ट्यूमर, सबसे बड़े आई ट्यूमर और सबसे बड़े ईयर ट्यूमर को निकालने के राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाए हैं।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि यह उपलब्धि एम्स पटना को एडवांस्ड, एंडोस्कोपिक और मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में और मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से जटिल स्पाइन सर्जरी अब बिहार और पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए उनके अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो रही है।
एंडोस्कोपिक सर्जरी का एक और बड़ा लाभ है कि अस्पताल में कम समय तक रहना। जहां पारंपरिक ओपन स्पाइन सर्जरी में मरीज को सामान्यतः 7-8 दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है वहीं उपयुक्त मरीजों में एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के बाद लगभग एक दिन में अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
महज 1.5-2 सेंटीमीटर का चीरा, 8 सेंटीमीटर की डिस्क का निष्कासन और एक नई सर्जिकल उपलब्धि, एम्स पटना की यह सफलता चिकित्सा तकनीक में नवाचार और मरीज केंद्रित उपचार की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।
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