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धर्म

पिपरई के लक्ष्मी नारायण मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं ने उत्सव मनाया

✍️ रिपोर्टर: Pranav Gaur 🗓 05 अक्टू. 2026, 11:26 PM 👁 12
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पिपरई में लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित शुद्ध संगीत सहित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धालुओं ने जयकारों और भजन-कीर्तन के साथ धूमधाम से मनाया।

पिपरई के लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कथा वाचक कपिल कृष्ण शास्त्री ने भक्त प्रह्लाद, विष्णु के वामन अवतार तथा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई, जिससे उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मन में भक्ति का संचार हुआ।

कथा के दौरान कपिल कृष्ण शास्त्री ने प्रह्लाद की अटूट भक्ति और हिरण्यकशिपु के प्रसंग के माध्यम से सच्ची श्रद्धा के महत्त्व को उजागर किया। उन्होंने कहा कि सच्चे विश्वास से किया गया प्रभु स्मरण कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को शक्ति प्रदान करता है। इसके बाद वामन अवतार के तीन पग भूमि माँगने तथा विराट स्वरूप धारण कर तीनों लोकों को नापने की कथा सुनाकर अहंकार त्याग, विनम्रता और दानशीलता का संदेश दिया गया।

जब कृष्ण जन्म का प्रसंग आया तो कथा पंडाल ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूँज उठा। कंस के कारागार में देवकी‑वसुदेव के यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट होने और बाद में वासुदेव द्वारा उन्हें गोकुल ले जाने की कथा ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। महिलाएँ, बच्चे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक जयकारे लगाते हुए भजन‑कीर्तन में भाग लिये।

संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने माहौल को और अधिक भक्तिपूर्ण बना दिया। कथा पंडाल में बधाइयाँ बाँटी गईं और जन्मोत्सव की खुशियाँ सभी के साथ साझा की गईं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने धर्म, भक्ति, सदाचार, विनम्रता और भगवान के प्रति आस्था का संदेश ग्रहण किया।

कथा के समापन पर पूरे मंदिर परिसर को उत्सव और भक्ति के माहौल ने भर दिया, जिससे पिपरई में इस धार्मिक आयोजन की महत्ता और प्रभाव स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हुआ।
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