Religion
पणजी: गोवा में नाग पंचमी का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास और गहरी धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। इस वर्ष सावन सोमवार के पावन संयोग के कारण श्रद्
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नाग पंचमी के अवसर पर घरों और मंदिरों में नाग देवता की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मिट्टी से बनी नाग की प्रतिमाओं या पारंपरिक रूप से तैयार नाग आकृतियों पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल औ
पणजी: गोवा में नाग पंचमी का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास और गहरी धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। इस वर्ष सावन सोमवार के पावन संयोग के कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। लोगों ने शिवालयों में पहुंचकर नाग देवता के साथ भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
नाग पंचमी के अवसर पर घरों और मंदिरों में नाग देवता की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मिट्टी से बनी नाग की प्रतिमाओं या पारंपरिक रूप से तैयार नाग आकृतियों पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित की। कई घरों में दूध, लाह्या, गेहूं की खीर, मीठी पातोली और अन्य पारंपरिक पकवानों का नैवेद्य भी चढ़ाया गया।
गोवा की गोमंतकीय संस्कृति में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इसे श्रावण महीने के प्रमुख पर्वों में से एक माना जाता है। इस दिन लोग मिट्टी से बनी नाग देवता की प्रतिमा, जिसे स्थानीय रूप से ‘नागोबा’ कहा जाता है, घर लाकर विधि-विधान से पूजा करते हैं। यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और सर्पों के प्रति सम्मान की भावना को भी दर्शाता है।
नाग पंचमी का यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का सुंदर प्रतीक बनकर सामने आया।
नाग पंचमी के अवसर पर घरों और मंदिरों में नाग देवता की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मिट्टी से बनी नाग की प्रतिमाओं या पारंपरिक रूप से तैयार नाग आकृतियों पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित की। कई घरों में दूध, लाह्या, गेहूं की खीर, मीठी पातोली और अन्य पारंपरिक पकवानों का नैवेद्य भी चढ़ाया गया।
गोवा की गोमंतकीय संस्कृति में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इसे श्रावण महीने के प्रमुख पर्वों में से एक माना जाता है। इस दिन लोग मिट्टी से बनी नाग देवता की प्रतिमा, जिसे स्थानीय रूप से ‘नागोबा’ कहा जाता है, घर लाकर विधि-विधान से पूजा करते हैं। यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और सर्पों के प्रति सम्मान की भावना को भी दर्शाता है।
नाग पंचमी का यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का सुंदर प्रतीक बनकर सामने आया।