📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash Dwivedi
स्वास्थ्य
एनजीटी ने भोपाल में ई‑कचरा जलाने की जांच का आदेश, रिपोर्ट चार हफ्ते में
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 31 अग. 2026, 06:38 PM
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एनजीटी ने भोपाल में मोबाइल‑कंप्यूटर के खुले में जलाने की जांच के लिए समिति बनाकर चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी, अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल में ई‑कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण न होने और मोबाइल‑कंप्यूटर को खुले में जलाने के आरोपों पर कड़ी कार्रवाई की है, जिससे सीसा व अन्य विषाक्त पदार्थ वायुमंडल में निकल रहे हैं।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रभाव का आकलन करने हेतु न्यायाधिकरण ने एक तथ्य‑जांच समिति गठित की है और चार हफ्ते में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को निर्धारित है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ई‑कचरे की मात्रा और जलाने के स्थानों के संबंध में डेटा प्रदान करने के लिए कहा गया है। समिति मौजूदा ई‑कचरा प्रबंधन नियमों के पालन की भी जांच करेगी।
यदि जांच में विषाक्त धातुओं, विशेषकर सीसे, के उत्सर्जन की पुष्टि होती है, तो एनजीटी खुले में जलाने को रोकने, सुरक्षित संग्रहण और उचित रीसाइक्लिंग के आदेश दे सकता है।
यह कदम भारत में अनौपचारिक ई‑कचरा प्रसंस्करण से जुड़ी बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है, जहाँ अक्सर नियमानुसार रीसाइक्लिंग चैनलों को बायपास कर पर्यावरण व स्वास्थ्य को खतरा होता है।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रभाव का आकलन करने हेतु न्यायाधिकरण ने एक तथ्य‑जांच समिति गठित की है और चार हफ्ते में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को निर्धारित है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ई‑कचरे की मात्रा और जलाने के स्थानों के संबंध में डेटा प्रदान करने के लिए कहा गया है। समिति मौजूदा ई‑कचरा प्रबंधन नियमों के पालन की भी जांच करेगी।
यदि जांच में विषाक्त धातुओं, विशेषकर सीसे, के उत्सर्जन की पुष्टि होती है, तो एनजीटी खुले में जलाने को रोकने, सुरक्षित संग्रहण और उचित रीसाइक्लिंग के आदेश दे सकता है।
यह कदम भारत में अनौपचारिक ई‑कचरा प्रसंस्करण से जुड़ी बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है, जहाँ अक्सर नियमानुसार रीसाइक्लिंग चैनलों को बायपास कर पर्यावरण व स्वास्थ्य को खतरा होता है।