📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ianaré
धर्म
नागौर के 1000‑साल पुराने गोपीनाथ मंदिर में क्यों पूजते हैं खंडित मूर्ति?
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 17 सित. 2026, 03:31 PM
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नागौर के प्राचीन गोपीनाथ मंदिर में शताब्दियों से एक टूटे हुए भगवान गोपीनाथ की प्रतिमा की पूजा की जा रही है। यह प्रतिमा मध्यकालीन हमले के दौरान क्षतिग्रस्त हुई, परंतु इसकी पूजा परंपरा आज भी जारी है।
गोपीनाथ मंदिर, नागौर, राजस्थान, 1000 से अधिक वर्ष पुराना माना जाता है। स्थानीय पुरोहितों और मंदिर के अभिलेखों के अनुसार, मध्यकालीन हमले के दौरान भगवान गोपीनाथ की मुख्य प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई।
इस टूटे हुए प्रतिमा की पूजा शताब्दियों से जारी है। भक्तों का मानना है कि यह पूजा समर्पण और धैर्य का प्रतीक है।
मंदिर के अभिलेखों में घटना का विवरण और मंदिर की मरम्मत की प्रक्रिया दर्ज है, परंतु मूल टूटे हुए टुकड़े को पवित्र अवशेष के रूप में संरक्षित किया गया। आज हर वर्ष भक्त इस प्रतिमा के पास जाकर अनुष्ठान करते हैं, जिससे मंदिर की ऐतिहासिक विरासत जीवित रहती है।
यह परंपरा कठिनाइयों के बावजूद विश्वास की शक्ति को दर्शाती है, यह दिखाती है कि सांस्कृतिक प्रथाएँ कैसे समय के साथ बनी रहती हैं।
इस टूटे हुए प्रतिमा की पूजा शताब्दियों से जारी है। भक्तों का मानना है कि यह पूजा समर्पण और धैर्य का प्रतीक है।
मंदिर के अभिलेखों में घटना का विवरण और मंदिर की मरम्मत की प्रक्रिया दर्ज है, परंतु मूल टूटे हुए टुकड़े को पवित्र अवशेष के रूप में संरक्षित किया गया। आज हर वर्ष भक्त इस प्रतिमा के पास जाकर अनुष्ठान करते हैं, जिससे मंदिर की ऐतिहासिक विरासत जीवित रहती है।
यह परंपरा कठिनाइयों के बावजूद विश्वास की शक्ति को दर्शाती है, यह दिखाती है कि सांस्कृतिक प्रथाएँ कैसे समय के साथ बनी रहती हैं।