📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
देश
एमपी हाई कोर्ट ने कहा वकील की चूक से देरी को माफ़ किया जा सकता है
✍️ Live Law
🗓 10 अक्टू. 2026, 05:02 PM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि वकील की उचित उपाय बताने में चूक देरी को माफ़ करने का पर्याप्त कारण बन सकती है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब वकील अपने मुवक्किल को उचित कानूनी उपाय के बारे में नहीं बताता, तो यह चूक प्रक्रिया संबंधी देरी को माफ़ करने का वैध कारण बन सकती है। न्यायालय ने कहा कि देरी के कारणों की जाँच में पेशेवर लापरवाही को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रक्रिया समयसीमा का मुख्य उद्देश्य न्याय की कुशलता है, परन्तु इन समयसीमाओं को वकील की चूक के कारण पक्ष को दण्डित नहीं किया जाना चाहिए। "पर्याप्त कारण" के रूप में वकील की चूक को मान्यता देकर न्यायालय ने पक्ष की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
राज्य भर के कानूनी पेशेवरों को अब अपने मुवक्किलों को सही सलाह देने में अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि इस निर्णय से लापरवाही के संभावित परिणाम स्पष्ट होते हैं। यह रुख निचले अदालतों में देरी के आवेदन की समीक्षा को प्रभावित कर सकता है, जिससे देरी के पीछे के कारणों की अधिक सूक्ष्म जांच होगी।
लाइव लॉ द्वारा रिपोर्ट किए गए इस फैसले ने वकीलों की जिम्मेदारियों पर नया प्रकाश डाला है, विशेषकर सिविल मामलों में जहाँ प्रक्रिया का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रक्रिया समयसीमा का मुख्य उद्देश्य न्याय की कुशलता है, परन्तु इन समयसीमाओं को वकील की चूक के कारण पक्ष को दण्डित नहीं किया जाना चाहिए। "पर्याप्त कारण" के रूप में वकील की चूक को मान्यता देकर न्यायालय ने पक्ष की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
राज्य भर के कानूनी पेशेवरों को अब अपने मुवक्किलों को सही सलाह देने में अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि इस निर्णय से लापरवाही के संभावित परिणाम स्पष्ट होते हैं। यह रुख निचले अदालतों में देरी के आवेदन की समीक्षा को प्रभावित कर सकता है, जिससे देरी के पीछे के कारणों की अधिक सूक्ष्म जांच होगी।
लाइव लॉ द्वारा रिपोर्ट किए गए इस फैसले ने वकीलों की जिम्मेदारियों पर नया प्रकाश डाला है, विशेषकर सिविल मामलों में जहाँ प्रक्रिया का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है।