📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
राजनीति
मिज़ोरम‑त्रिपुरा ने सीमा विवाद पर पहली बातचीत शुरू की
✍️ The Times of India
🗓 14 सित. 2026, 02:17 AM
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मिज़ोरम और त्रिपुरा के अधिकारियों ने सीमा विवाद सुलझाने के लिए पहली बैठक की, शांति‑पूर्ण समाधान की आशा जताई।
मिज़ोरम और त्रिपुरा के अधिकारियों ने प्राचीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पहली औपचारिक बातचीत की। यह बैठक दोनों राज्यों के बीच कई सालों से चल रहे सीमा मुद्दे पर पहला संवाद था।
दोनों पक्षों ने बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की प्रतिबद्धता जताई, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और सीमा के पार स्थित विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने‑अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए और ऐतिहासिक मानचित्र व सर्वेक्षण डेटा की जांच के लिए एक संयुक्त तकनीकी समिति बनाने पर सहमति व्यक्त की।
इन वार्ताओं से आगे के सत्रों का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक दोनों पक्षों को स्वीकार्य समझौता तैयार किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शांति‑पूर्ण समाधान से सीमा के दोनों ओर के स्थानीय समुदायों के लिए बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
अंतिम निर्णय अभी नहीं आया, पर संवाद की इच्छा को सकारात्मक कदम माना गया है, जिससे सीमा क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है।
सरकारें यह भी संकेत दे रही हैं कि किसी भी समझौते को संविधान के अनुच्छेदों के तहत केंद्रीय सरकार की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
दोनों पक्षों ने बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की प्रतिबद्धता जताई, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और सीमा के पार स्थित विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने‑अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए और ऐतिहासिक मानचित्र व सर्वेक्षण डेटा की जांच के लिए एक संयुक्त तकनीकी समिति बनाने पर सहमति व्यक्त की।
इन वार्ताओं से आगे के सत्रों का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक दोनों पक्षों को स्वीकार्य समझौता तैयार किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शांति‑पूर्ण समाधान से सीमा के दोनों ओर के स्थानीय समुदायों के लिए बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
अंतिम निर्णय अभी नहीं आया, पर संवाद की इच्छा को सकारात्मक कदम माना गया है, जिससे सीमा क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है।
सरकारें यह भी संकेत दे रही हैं कि किसी भी समझौते को संविधान के अनुच्छेदों के तहत केंद्रीय सरकार की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।