📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises
राजनीति
गिरिराज सिंह ने मुस्लिम महिलाओं के प्रदर्शन पर राहुल गांधी को वोट‑बैंक राजनीति का आरोप
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 28 अग. 2026, 12:18 AM
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बेगूसराय में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं के प्रदर्शन को वोट‑बैंक राजनीति का साधन बताकर राहुल गांधी पर निशाना साधा।
बिहार के बेगूसराय में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं के प्रदर्शन के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भीड़ को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि पार्टी इस प्रदर्शन को मुस्लिम वोटों को सुरक्षित करने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
सिंह ने शहाबानो मामले और तीन तलाक के मुद्दे का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस बार‑बार ऐसे सामुदायिक मुद्दों को चुनावी लाभ के लिए उठाती है। उनका कहना था कि यह प्रदर्शन पार्टी की वोट‑बैंक रणनीति का हिस्सा है, न कि वास्तविक जनभाईचारा।
स्थानीय मुस्लिम महिलाओं द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में कुछ चिंताएँ उजागर हुईं, परन्तु अभी तक राहुल गांधी या कांग्रेस नेतृत्व की कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना बिहार के चुनावी माहौल में सामुदायिक रेटोरिक के बढ़ते प्रयोग को दर्शाती है, जहाँ भाजपा कांग्रेस को वोट‑बैंक पर निर्भर बताने की कोशिश कर रही है।
यह घटना दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच बढ़ती तनाव को दर्शाती है और आगामी राज्य व राष्ट्रीय चुनावों से पहले सामुदायिक मुद्दों के राजनीतिकरण को उजागर करती है।
सिंह ने शहाबानो मामले और तीन तलाक के मुद्दे का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस बार‑बार ऐसे सामुदायिक मुद्दों को चुनावी लाभ के लिए उठाती है। उनका कहना था कि यह प्रदर्शन पार्टी की वोट‑बैंक रणनीति का हिस्सा है, न कि वास्तविक जनभाईचारा।
स्थानीय मुस्लिम महिलाओं द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में कुछ चिंताएँ उजागर हुईं, परन्तु अभी तक राहुल गांधी या कांग्रेस नेतृत्व की कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना बिहार के चुनावी माहौल में सामुदायिक रेटोरिक के बढ़ते प्रयोग को दर्शाती है, जहाँ भाजपा कांग्रेस को वोट‑बैंक पर निर्भर बताने की कोशिश कर रही है।
यह घटना दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच बढ़ती तनाव को दर्शाती है और आगामी राज्य व राष्ट्रीय चुनावों से पहले सामुदायिक मुद्दों के राजनीतिकरण को उजागर करती है।