📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / GeoEvan (www.polgeonow.com)
राजनीति
मेघालय विधानसभा ने यूरेनियम खनन के विरोध में प्रस्ताव पारित किया
✍️ Telangana Today
🗓 26 अग. 2026, 07:18 PM
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मेघालय विधानसभा ने राज्य में यूरेनियम अन्वेषण या खनन के किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार करने का निर्णय लिया, जिससे परमाणु संसाधन उत्खनन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्शाया गया।
मेघालय विधानसभा के 60 सदस्यों ने शिलांग में बैठक बुलाई और राज्य की सीमाओं के भीतर यूरेनियम अन्वेषण व खनन को रोकने वाला प्रस्ताव पारित किया। विधायक इस कदम को क्षेत्र की नाज़ुक पारिस्थितिकी और जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानते हैं।
विपक्षी दलों द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव केंद्र सरकार से सभी लंबित परमाणु संसाधन परियोजनाओं को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य की स्थिति का सम्मान करने का आग्रह करता है। साथ ही यह राज्य कार्यकारिणी को ऐसे वैकल्पिक विकास मार्ग खोजने की सलाह देता है, जो खतरनाक खनन से मुक्त हों।
हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, पर यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय राजनेता यूरेनियम उत्खनन के पर्यावरणीय व सामाजिक जोखिमों को लेकर एकजुट हैं। केंद्र सरकार ने अभी तक मेघालय की मांग पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पर्यावरण संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह कहते हुए कि यह उत्तरपूर्व के व्यापक एंटी‑न्यूक्लियर भावना के अनुरूप है। विधानसभा का यह कदम अन्य खनिज‑समृद्ध राज्यों में खनन व ऊर्जा नीति पर भविष्य की बहस को प्रभावित कर सकता है।
विपक्षी दलों द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव केंद्र सरकार से सभी लंबित परमाणु संसाधन परियोजनाओं को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य की स्थिति का सम्मान करने का आग्रह करता है। साथ ही यह राज्य कार्यकारिणी को ऐसे वैकल्पिक विकास मार्ग खोजने की सलाह देता है, जो खतरनाक खनन से मुक्त हों।
हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, पर यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय राजनेता यूरेनियम उत्खनन के पर्यावरणीय व सामाजिक जोखिमों को लेकर एकजुट हैं। केंद्र सरकार ने अभी तक मेघालय की मांग पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पर्यावरण संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह कहते हुए कि यह उत्तरपूर्व के व्यापक एंटी‑न्यूक्लियर भावना के अनुरूप है। विधानसभा का यह कदम अन्य खनिज‑समृद्ध राज्यों में खनन व ऊर्जा नीति पर भविष्य की बहस को प्रभावित कर सकता है।