📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Aiban-03
अपराध
मेघालय हाई कोर्ट ने पीओसीएसओ केस में जेल में रहे व्यक्ति को रिहा किया
✍️ Hub News
🗓 17 सित. 2026, 12:01 PM
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मेघालय हाई कोर्ट ने पीओसीएसओ के तहत जेल में रहे व्यक्ति को रिहा कर दिया, क्योंकि FIR के बाद की तिथि वाला एक पत्र मिला, जिससे सबूतों पर सवाल उठे।
मेघालय हाई कोर्ट ने पीओसीएसओ (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत सजा काट रहे एक व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया है। यह व्यक्ति पहले दोषी ठहराया गया था और अपील के दौरान जेल में था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत एक पत्र को देखा, जिसका दिनांक FIR दर्ज होने के बाद का था। इस तिथि में अंतर ने न्यायालय को दस्तावेज़ की प्रामाणिकता और साक्ष्य के रूप में उसकी वैधता पर सवाल उठाने पर मजबूर किया।
कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि पोस्ट‑FIR पत्र ने मुकदमे की निष्पक्षता को प्रभावित किया हो सकता है, इसलिए आरोपी को तुरंत रिहा करने और मामले को पुनः परीक्षण के लिए निचली अदालत को भेजने का निर्देश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला संवेदनशील पीओसीएसओ मामलों में प्रक्रियात्मक शुद्धता को बनाए रखने के लिए न्यायपालिका की सतर्कता को दर्शाता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत एक पत्र को देखा, जिसका दिनांक FIR दर्ज होने के बाद का था। इस तिथि में अंतर ने न्यायालय को दस्तावेज़ की प्रामाणिकता और साक्ष्य के रूप में उसकी वैधता पर सवाल उठाने पर मजबूर किया।
कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि पोस्ट‑FIR पत्र ने मुकदमे की निष्पक्षता को प्रभावित किया हो सकता है, इसलिए आरोपी को तुरंत रिहा करने और मामले को पुनः परीक्षण के लिए निचली अदालत को भेजने का निर्देश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला संवेदनशील पीओसीएसओ मामलों में प्रक्रियात्मक शुद्धता को बनाए रखने के लिए न्यायपालिका की सतर्कता को दर्शाता है।