📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rocky Masum
This work was made by Masum-al-
खानपान
मेघालय और यूएन विश्व खाद्य कार्यक्रम ने खाद्य सुरक्षा साझेदारी को मजबूत किया
✍️ Highland Post
🗓 01 अक्टू. 2026, 12:32 PM
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मेघालय सरकार और यूएन विश्व खाद्य कार्यक्रम ने राज्य में खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए अपनी साझेदारी को मजबूत किया है।
मेघालय सरकार और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने राज्य के कमजोर वर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु साझेदारी को मजबूत करने की घोषणा की है। हाईलैंड पोस्ट के अनुसार, इस समझौते के तहत पोषण सुधार, आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करना और स्थानीय प्राधिकरणों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
सहयोग का मुख्य ध्यान पोषण कार्यक्रमों का विस्तार, छोटे किसानों का समर्थन और दूरस्थ जिलों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं के वितरण को बेहतर बनाना है। दोनों पक्ष इस पहल को राज्य की मौजूदा योजनाओं और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा ढांचे के साथ जोड़ने का लक्ष्य रख रहे हैं।
राज्य और डब्ल्यूएफपी के अधिकारियों ने बताया कि इस साझेदारी में क्षमता‑निर्माण कार्यशालाएँ, डेटा‑आधारित निगरानी और जलवायु‑सहनशील कृषि प्रथाओं का उपयोग शामिल होगा, जिससे क्षेत्र में अक्सर होने वाले अनियमित मौसम के प्रभाव को कम किया जा सके।
डब्ल्यूएफपी की वैश्विक विशेषज्ञता को मेघालय की स्थानीय समझ के साथ मिलाकर, इस कार्यक्रम का उद्देश्य भूख को कम करना और विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना है।
यह कदम उत्तरपूर्व में बढ़ती खाद्य असुरक्षा और सीमित बाजार पहुँच के कारण उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनज़र एक समयोचित हस्तक्षेप माना जा रहा है।
सहयोग का मुख्य ध्यान पोषण कार्यक्रमों का विस्तार, छोटे किसानों का समर्थन और दूरस्थ जिलों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं के वितरण को बेहतर बनाना है। दोनों पक्ष इस पहल को राज्य की मौजूदा योजनाओं और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा ढांचे के साथ जोड़ने का लक्ष्य रख रहे हैं।
राज्य और डब्ल्यूएफपी के अधिकारियों ने बताया कि इस साझेदारी में क्षमता‑निर्माण कार्यशालाएँ, डेटा‑आधारित निगरानी और जलवायु‑सहनशील कृषि प्रथाओं का उपयोग शामिल होगा, जिससे क्षेत्र में अक्सर होने वाले अनियमित मौसम के प्रभाव को कम किया जा सके।
डब्ल्यूएफपी की वैश्विक विशेषज्ञता को मेघालय की स्थानीय समझ के साथ मिलाकर, इस कार्यक्रम का उद्देश्य भूख को कम करना और विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना है।
यह कदम उत्तरपूर्व में बढ़ती खाद्य असुरक्षा और सीमित बाजार पहुँच के कारण उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनज़र एक समयोचित हस्तक्षेप माना जा रहा है।