📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Benjamin Smith
धर्म
मार्सेल गांव की इको‑फ्रेंडली गणेश मूर्ति परम्परा में गिरावट
✍️ The Times of India
🗓 04 अक्टू. 2026, 07:36 AM
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इको‑फ्रेंडली गणेश मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध मार्सेल गांव में इस परम्परा को जारी रखने वाले कारीगरों की संख्या घटने से यह प्रथा धीरे‑धीरे खत्म हो रही है।
मार्सेल गांव, जो इको‑फ्रेंडली गणेश मूर्तियों के निर्माण के लिए जाना जाता है, अब अपनी इस परम्परा में स्पष्ट गिरावट देख रहा है। इन मूर्तियों को पारंपरिक रूप से प्राकृतिक मिट्टी और अन्य जैविक सामग्री से तैयार किया जाता है, जो गणेश चतुर्थी के दौरान पर्यावरण‑सुरक्षित उत्सव का प्रतीक रही है।
पिछले कुछ वर्षों में इस कारीगरी में निपुण कारीगरों की संख्या में तीव्र कमी आई है। युवा वर्ग अन्य पेशों की ओर रुख कर रहा है, जिससे इस मेहनत‑भरे और समय‑साध्य प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाले हाथ कम होते जा रहे हैं।
स्थानीय सांस्कृतिक समूह और नगर निकाय इस बात को लेकर चिंतित हैं कि परम्परा के क्षीण होने से न केवल गांव की सांस्कृतिक पहचान घटेगी, बल्कि पर्यावरण‑सुरक्षित उत्सव प्रथा को भी नुकसान पहुँचेगा।
पिछले कुछ वर्षों में इस कारीगरी में निपुण कारीगरों की संख्या में तीव्र कमी आई है। युवा वर्ग अन्य पेशों की ओर रुख कर रहा है, जिससे इस मेहनत‑भरे और समय‑साध्य प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाले हाथ कम होते जा रहे हैं।
स्थानीय सांस्कृतिक समूह और नगर निकाय इस बात को लेकर चिंतित हैं कि परम्परा के क्षीण होने से न केवल गांव की सांस्कृतिक पहचान घटेगी, बल्कि पर्यावरण‑सुरक्षित उत्सव प्रथा को भी नुकसान पहुँचेगा।