मेरठ बरेली परिक्षेत्र में शीघ्र होगा उत्तर प्रदेश के अपराध निरोधक समिति का विस्तारीकरण जी के पाठक
मेरठ–बरेली परिक्षेत्र में शीघ्र होगा उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति का विस्तारीकरण : जी.के. पाठक
ब्यूरो चीफ राशिद अल्वी
समाजसेवियों को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपकर जनसेवा से जोड़ेगी समिति, बंदियों के कल्याण एवं पुनर्वास के लिए चलाए जाएंगे विशेष कार्यक्रम
संवाददाता विशेष | मेरठ–बरेली परिक्षेत्र
प्रश्न: उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति की ओर से मेरठ–बरेली परिक्षेत्र में क्या नई योजनाएँ बनाई जा रही हैं?
जी.के. पाठक: उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति, लखनऊ के माध्यम से जनसेवा, सामाजिक जागरूकता और जेलों में निरुद्ध बंदियों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मेरठ–बरेली परिक्षेत्र में शीघ्र ही समिति का विस्तारीकरण किया जाएगा। हमारा उद्देश्य समाज के वरिष्ठ, अनुभवी, प्रतिष्ठित एवं राष्ट्रसेवा की भावना से ओतप्रोत समाजसेवियों को समिति से जोड़ना है, ताकि उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व सौंपकर जनहित के कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके।
प्रश्न: समिति के विस्तारीकरण के माध्यम से समाज को किस प्रकार लाभ पहुँचाने की योजना है?
जी.के. पाठक: समिति का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने वाले लोगों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। मेरठ–बरेली परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जनपदों में योग्य एवं समर्पित व्यक्तियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ देकर जनसेवा, सामाजिक सहयोग, अपराध निरोधक जागरूकता तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़े कार्यक्रमों को गति दी जाएगी। हम चाहते हैं कि समाज के प्रतिष्ठित लोग अपनी क्षमता, अनुभव और संसाधनों का उपयोग राष्ट्र एवं समाज के हित में करें।
प्रश्न: जिला कारागारों में निरुद्ध बंदियों के कल्याण के लिए समिति की क्या कार्ययोजना है?
जी.के. पाठक: जेलों में निरुद्ध बंदियों के कल्याण, मानवीय गरिमा और सामाजिक पुनर्वास के विषय में समिति विशेष रूप से प्रयास करना चाहती है। संबंधित परिक्षेत्र की जिला कारागारों में आवश्यकतानुसार जागरूकता, शिक्षा, कौशल विकास, प्रशिक्षण और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रम संचालित कराने के लिए संबंधित जेल प्रशासन एवं सक्षम विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। हमारा मानना है कि बंदियों को सुधार, शिक्षा और हुनर के अवसर उपलब्ध कराना समाज की मुख्यधारा में उनकी सम्मानजनक वापसी के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न: जेलों में निरुद्ध दिव्यांग बंदियों के लिए समिति क्या विशेष प्रयास करेगी?
जी.के. पाठक: यह एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। समिति संबंधित जिला कारागारों में निरुद्ध दिव्यांग बंदियों की स्थिति, उनकी आवश्यकताओं तथा उन्हें उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करेगी। इसके बाद पात्र बंदियों को दिव्यांगजन सशक्तीकरण एवं समाज कल्याण से संबंधित सक्षम विभागों की योजनाओं और अनुमन्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक समन्वय किया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण उचित सहायता से वंचित न रहना पड़े। यह कार्य संबंधित नियमों, पात्रता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाएगा।
प्रश्न: जेल से रिहा होने वाले बंदियों के पुनर्वास के लिए समिति की क्या योजना है?
जी.के. पाठक: किसी व्यक्ति की सजा पूरी होने अथवा रिहा होने के बाद उसके सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और समाज में दोबारा सम्मानजनक स्थान प्राप्त करना शामिल हो सकता है। यदि उसे सही मार्गदर्शन और रोजगार का अवसर मिले, तो वह अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकता है। इसी उद्देश्य से समिति रिहा बंदियों को कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार तथा उपलब्ध सरकारी योजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर कार्य करेगी। स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के अनुरूप कुटीर उद्योगों एवं छोटे स्वरोजगार के अवसर विकसित कराने के लिए संबंधित विभागों, सामाजिक संस्थाओं और इच्छुक उद्यमियों से सहयोग लेने का प्रयास भी किया जाएगा।
प्रश्न: क्या जेलों में निरुद्ध बंदियों को भी कुटीर उद्योगों और स्वरोजगार से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा?
जी.के. पाठक: जी हाँ, यह हमारी प्रस्तावित कार्ययोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जेलों में निरुद्ध बंदियों के लिए उनकी रुचि, योग्यता और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सिलाई, हस्तशिल्प, घरेलू उत्पाद निर्माण तथा अन्य उपयुक्त कुटीर उद्योगों से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के संचालन के लिए जेल प्रशासन, कौशल विकास से जुड़े विभागों और प्रशिक्षित व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त करने का प्रयास होगा। हमारा उद्देश्य है कि बंदी जेल से बाहर आने के बाद किसी उपयोगी हुनर के साथ आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत कर सकें।
प्रश्न: इस पूरी कार्ययोजना में समिति की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या होगी?
जी.के. पाठक: हमारी प्राथमिकता है कि समाजसेवा को केवल औपचारिक गतिविधि तक सीमित न रखकर उसे जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचाया जाए। अपराध निरोधक जागरूकता, बंदियों का कल्याण, दिव्यांगजनों को अनुमन्य सुविधाओं से जोड़ना, कौशल विकास और रिहा बंदियों के पुनर्वास जैसे विषयों पर समन्वित प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, जेल प्रशासन, समाजसेवियों और विभागीय संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।
प्रश्न: अंत में आप समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों और समाजसेवियों से क्या कहना चाहेंगे?
जी.के. पाठक: मैं मेरठ–बरेली परिक्षेत्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों, शिक्षाविदों, उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रसेवा में रुचि रखने वाले लोगों से आह्वान करता हूँ कि वे समाजहित के इस प्रयास में सक्रिय भागीदारी करें। समिति के विस्तारीकरण के दौरान योग्य एवं सेवाभावी व्यक्तियों को जिम्मेदारियाँ सौंपकर जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान दें, जहाँ जरूरतमंद को सहायता, दिव्यांगजन को सम्मान, बंदियों को सुधार का अवसर और रिहा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग मिल सके
जी.के. पाठक के अनुसार, उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति, लखनऊ की प्रस्तावित कार्ययोजना में संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और बंदियों के कल्याण को विशेष महत्व दिया जाएगा। मेरठ–बरेली परिक्षेत्र में समाजसेवियों को जोड़ने, कारागारों में कौशल विकास की संभावनाएँ तलाशने, पात्र दिव्यांग बंदियों को अनुमन्य सुविधाओं से जोड़ने तथा रिहा बंदियों के पुनर्वास के लिए समन्वित प्रयास किए जाने की योजना है। इन पहलों का वास्तविक क्रियान्वयन संबंधित विभागों की अनुमति, नियमों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप किया जाएगा
रामपुर शाहबाद से राशिद अल्वी की रिपोर्ट
ब्यूरो चीफ राशिद अल्वी
समाजसेवियों को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपकर जनसेवा से जोड़ेगी समिति, बंदियों के कल्याण एवं पुनर्वास के लिए चलाए जाएंगे विशेष कार्यक्रम
संवाददाता विशेष | मेरठ–बरेली परिक्षेत्र
प्रश्न: उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति की ओर से मेरठ–बरेली परिक्षेत्र में क्या नई योजनाएँ बनाई जा रही हैं?
जी.के. पाठक: उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति, लखनऊ के माध्यम से जनसेवा, सामाजिक जागरूकता और जेलों में निरुद्ध बंदियों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मेरठ–बरेली परिक्षेत्र में शीघ्र ही समिति का विस्तारीकरण किया जाएगा। हमारा उद्देश्य समाज के वरिष्ठ, अनुभवी, प्रतिष्ठित एवं राष्ट्रसेवा की भावना से ओतप्रोत समाजसेवियों को समिति से जोड़ना है, ताकि उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व सौंपकर जनहित के कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके।
प्रश्न: समिति के विस्तारीकरण के माध्यम से समाज को किस प्रकार लाभ पहुँचाने की योजना है?
जी.के. पाठक: समिति का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने वाले लोगों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। मेरठ–बरेली परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जनपदों में योग्य एवं समर्पित व्यक्तियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ देकर जनसेवा, सामाजिक सहयोग, अपराध निरोधक जागरूकता तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़े कार्यक्रमों को गति दी जाएगी। हम चाहते हैं कि समाज के प्रतिष्ठित लोग अपनी क्षमता, अनुभव और संसाधनों का उपयोग राष्ट्र एवं समाज के हित में करें।
प्रश्न: जिला कारागारों में निरुद्ध बंदियों के कल्याण के लिए समिति की क्या कार्ययोजना है?
जी.के. पाठक: जेलों में निरुद्ध बंदियों के कल्याण, मानवीय गरिमा और सामाजिक पुनर्वास के विषय में समिति विशेष रूप से प्रयास करना चाहती है। संबंधित परिक्षेत्र की जिला कारागारों में आवश्यकतानुसार जागरूकता, शिक्षा, कौशल विकास, प्रशिक्षण और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रम संचालित कराने के लिए संबंधित जेल प्रशासन एवं सक्षम विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। हमारा मानना है कि बंदियों को सुधार, शिक्षा और हुनर के अवसर उपलब्ध कराना समाज की मुख्यधारा में उनकी सम्मानजनक वापसी के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न: जेलों में निरुद्ध दिव्यांग बंदियों के लिए समिति क्या विशेष प्रयास करेगी?
जी.के. पाठक: यह एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। समिति संबंधित जिला कारागारों में निरुद्ध दिव्यांग बंदियों की स्थिति, उनकी आवश्यकताओं तथा उन्हें उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करेगी। इसके बाद पात्र बंदियों को दिव्यांगजन सशक्तीकरण एवं समाज कल्याण से संबंधित सक्षम विभागों की योजनाओं और अनुमन्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक समन्वय किया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण उचित सहायता से वंचित न रहना पड़े। यह कार्य संबंधित नियमों, पात्रता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाएगा।
प्रश्न: जेल से रिहा होने वाले बंदियों के पुनर्वास के लिए समिति की क्या योजना है?
जी.के. पाठक: किसी व्यक्ति की सजा पूरी होने अथवा रिहा होने के बाद उसके सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और समाज में दोबारा सम्मानजनक स्थान प्राप्त करना शामिल हो सकता है। यदि उसे सही मार्गदर्शन और रोजगार का अवसर मिले, तो वह अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकता है। इसी उद्देश्य से समिति रिहा बंदियों को कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार तथा उपलब्ध सरकारी योजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर कार्य करेगी। स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के अनुरूप कुटीर उद्योगों एवं छोटे स्वरोजगार के अवसर विकसित कराने के लिए संबंधित विभागों, सामाजिक संस्थाओं और इच्छुक उद्यमियों से सहयोग लेने का प्रयास भी किया जाएगा।
प्रश्न: क्या जेलों में निरुद्ध बंदियों को भी कुटीर उद्योगों और स्वरोजगार से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा?
जी.के. पाठक: जी हाँ, यह हमारी प्रस्तावित कार्ययोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जेलों में निरुद्ध बंदियों के लिए उनकी रुचि, योग्यता और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सिलाई, हस्तशिल्प, घरेलू उत्पाद निर्माण तथा अन्य उपयुक्त कुटीर उद्योगों से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के संचालन के लिए जेल प्रशासन, कौशल विकास से जुड़े विभागों और प्रशिक्षित व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त करने का प्रयास होगा। हमारा उद्देश्य है कि बंदी जेल से बाहर आने के बाद किसी उपयोगी हुनर के साथ आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत कर सकें।
प्रश्न: इस पूरी कार्ययोजना में समिति की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या होगी?
जी.के. पाठक: हमारी प्राथमिकता है कि समाजसेवा को केवल औपचारिक गतिविधि तक सीमित न रखकर उसे जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचाया जाए। अपराध निरोधक जागरूकता, बंदियों का कल्याण, दिव्यांगजनों को अनुमन्य सुविधाओं से जोड़ना, कौशल विकास और रिहा बंदियों के पुनर्वास जैसे विषयों पर समन्वित प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, जेल प्रशासन, समाजसेवियों और विभागीय संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।
प्रश्न: अंत में आप समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों और समाजसेवियों से क्या कहना चाहेंगे?
जी.के. पाठक: मैं मेरठ–बरेली परिक्षेत्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों, शिक्षाविदों, उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रसेवा में रुचि रखने वाले लोगों से आह्वान करता हूँ कि वे समाजहित के इस प्रयास में सक्रिय भागीदारी करें। समिति के विस्तारीकरण के दौरान योग्य एवं सेवाभावी व्यक्तियों को जिम्मेदारियाँ सौंपकर जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान दें, जहाँ जरूरतमंद को सहायता, दिव्यांगजन को सम्मान, बंदियों को सुधार का अवसर और रिहा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग मिल सके
जी.के. पाठक के अनुसार, उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति, लखनऊ की प्रस्तावित कार्ययोजना में संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और बंदियों के कल्याण को विशेष महत्व दिया जाएगा। मेरठ–बरेली परिक्षेत्र में समाजसेवियों को जोड़ने, कारागारों में कौशल विकास की संभावनाएँ तलाशने, पात्र दिव्यांग बंदियों को अनुमन्य सुविधाओं से जोड़ने तथा रिहा बंदियों के पुनर्वास के लिए समन्वित प्रयास किए जाने की योजना है। इन पहलों का वास्तविक क्रियान्वयन संबंधित विभागों की अनुमति, नियमों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप किया जाएगा
रामपुर शाहबाद से राशिद अल्वी की रिपोर्ट