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मामचारी गांव में श्मशान तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं, अंतिम यात्रा बनी मुश्किल
ग्राम पंचायत मामचारी में श्मशान घाटों की बदहाल स्थिति के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उचित रास्ते और भूमि के अभाव में अंतिम यात्राएं जालियों और झाड़ियों के बीच से निकालने को मजबूर हैं।
ग्राम पंचायत मामचारी में श्मशान घाटों की दयनीय स्थिति और अंतिम संस्कार के लिए उचित रास्ते व भूमि उपलब्ध न होने से ग्रामीण गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। हाल ही में गांव में दो युवाओं की मृत्यु के उपरांत उनकी अंतिम यात्रा को भी जालियों और झाड़ियों के बीच से होकर निकालना पड़ा, जो गांव की एक बुनियादी समस्या को रेखांकित करता है। ग्रामीणों के अनुसार, सर्व समाज के श्मशान घाटों तक पहुंचने के लिए कोई रिकॉर्ड रास्ता नहीं है और न ही व्यवस्थित भूमि की व्यवस्था है, जिससे शव को अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
बरसात के मौसम में यह समस्या और भी विकट हो जाती है। नदी में जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों को कई बार कमर तक पानी में चलकर शव ले जाना पड़ता है। वहीं, खेतों में खड़ी फसलों और आवारा पशुओं से बचाव के लिए किसानों द्वारा लगाई गई जालियां रास्ते को अवरुद्ध कर देती हैं, जिससे शव को जालियों के ऊपर से और झाड़ियों के बीच से निकालना पड़ता है। यह परिस्थिति न केवल मृतक के परिजनों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है, बल्कि अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले ग्रामीणों के लिए भी असुविधा और जोखिम का कारण बनती है।
स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि श्मशान घाटों पर टीनशेड तक की व्यवस्था नहीं है। बारिश होने पर अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को बरसात रुकने का इंतजार करना पड़ता है। श्मशान घाट जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी उचित व्यवस्था का अभाव ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत की बैठकों, जिला कलेक्टर की रात्रि चौपालों और विभिन्न सरकारी शिविरों में कई बार प्रस्ताव रखे गए हैं, लेकिन अब तक श्मशान घाट के लिए भूमि आवंटन और वहां तक पहुंचने के लिए रिकॉर्ड रास्ता उपलब्ध कराने की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को उतारू हो सकते हैं।
बरसात के मौसम में यह समस्या और भी विकट हो जाती है। नदी में जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों को कई बार कमर तक पानी में चलकर शव ले जाना पड़ता है। वहीं, खेतों में खड़ी फसलों और आवारा पशुओं से बचाव के लिए किसानों द्वारा लगाई गई जालियां रास्ते को अवरुद्ध कर देती हैं, जिससे शव को जालियों के ऊपर से और झाड़ियों के बीच से निकालना पड़ता है। यह परिस्थिति न केवल मृतक के परिजनों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है, बल्कि अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले ग्रामीणों के लिए भी असुविधा और जोखिम का कारण बनती है।
स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि श्मशान घाटों पर टीनशेड तक की व्यवस्था नहीं है। बारिश होने पर अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को बरसात रुकने का इंतजार करना पड़ता है। श्मशान घाट जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी उचित व्यवस्था का अभाव ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत की बैठकों, जिला कलेक्टर की रात्रि चौपालों और विभिन्न सरकारी शिविरों में कई बार प्रस्ताव रखे गए हैं, लेकिन अब तक श्मशान घाट के लिए भूमि आवंटन और वहां तक पहुंचने के लिए रिकॉर्ड रास्ता उपलब्ध कराने की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को उतारू हो सकते हैं।