📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ian Capper
बिज़नेस
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र बन गए किफायती घरों के नए हब, खरीदारों का मेट्रो से हटना
✍️ Moneycontrol.com
🗓 30 अक्टू. 2026, 10:37 AM
👁 19
किफायती घरों की बढ़ती मांग मेट्रो शहरों से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की ओर मुड़ रही है, जिससे डेवलपर्स ने इन क्षेत्रों पर ध्यान दिया है।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किफायती आवास की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, जिससे खरीदार बड़े मेट्रो शहरों से बाहर निकल रहे हैं, यह मनीकंट्रोल के एक विश्लेषण में बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार घर खरीदने वाले कई लोग दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महँगे शहरों की बजाय अधिक सस्ते विकल्पों की तलाश में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे कम ज़मीन की कीमतें, राज्य‑स्तर की प्रोत्साहन योजनाएँ और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे कारक हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र ने टैक्स रिबेट, सब्सिडी वाले लोन और विभिन्न आवास योजनाओं के तहत खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन प्रदान किए हैं।
रियल एस्टेट कंपनियां अब मध्य‑वर्गीय खरीदारों को लक्षित करते हुए अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स और गेटेड कम्युनिटी जैसे प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रही हैं। इन नए हबों में कीमतें मेट्रो के समान प्रोजेक्ट्स से 30‑40% कम बताई जा रही हैं, जिससे खरीदारों को बेहतर मूल्य मिल रहा है।
उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि शहरीकरण के विस्तार और 2025 तक 20 मिलियन किफायती घरों के लक्ष्य को देखते हुए यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहेगी, जिससे मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राष्ट्रीय आवास योजना में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे कम ज़मीन की कीमतें, राज्य‑स्तर की प्रोत्साहन योजनाएँ और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे कारक हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र ने टैक्स रिबेट, सब्सिडी वाले लोन और विभिन्न आवास योजनाओं के तहत खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन प्रदान किए हैं।
रियल एस्टेट कंपनियां अब मध्य‑वर्गीय खरीदारों को लक्षित करते हुए अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स और गेटेड कम्युनिटी जैसे प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रही हैं। इन नए हबों में कीमतें मेट्रो के समान प्रोजेक्ट्स से 30‑40% कम बताई जा रही हैं, जिससे खरीदारों को बेहतर मूल्य मिल रहा है।
उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि शहरीकरण के विस्तार और 2025 तक 20 मिलियन किफायती घरों के लक्ष्य को देखते हुए यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहेगी, जिससे मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राष्ट्रीय आवास योजना में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।