📷 चित्र स्रोत: Indian Express (via NewsData)
देश
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा: बच्चे की इच्छा ही अभिरक्षा निर्धारित करने के लिए पर्याप्त नहीं
✍️ Indian Express
🗓 01 सित. 2026, 06:46 AM
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि बच्चे की किसी माता‑पिता के प्रति प्राथमिकता alone अभिरक्षा तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कई कारकों पर विचार करना आवश्यक है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक हालिया निर्णय में स्पष्ट किया गया कि हालांकि बच्चे की इच्छा प्रासंगिक है, लेकिन वह अकेले ही अभिरक्षा प्रदान करने का आधार नहीं हो सकती। पीठ ने कहा कि बच्चे के कल्याण का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न परिस्थितियों का समग्र आकलन आवश्यक है।
अदालत ने उल्लेख किया कि केवल बच्चे की प्राथमिकता पर निर्भर रहने से माता‑पिता की देखभाल करने की क्षमता, स्थिरता और बच्चे के समग्र हित जैसे महत्वपूर्ण पहलू अनदेखे रह सकते हैं। इसने निचली अदालतों से कहा कि निर्णय लेने से पहले सभी प्रासंगिक कारकों पर विचार किया जाना चाहिए।
यह निर्णय राज्य के पारिवारिक न्यायालयों के लिए एक दिशानिर्देश के रूप में काम करता है, जो अभिरक्षा निर्धारण में बच्चे के कल्याण को उसकी mere प्राथमिकता से ऊपर रखने पर बल देता है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय बच्च‑केंद्रित विधि विज्ञान के सिद्धांतों के अनुरूप है।
अदालत ने उल्लेख किया कि केवल बच्चे की प्राथमिकता पर निर्भर रहने से माता‑पिता की देखभाल करने की क्षमता, स्थिरता और बच्चे के समग्र हित जैसे महत्वपूर्ण पहलू अनदेखे रह सकते हैं। इसने निचली अदालतों से कहा कि निर्णय लेने से पहले सभी प्रासंगिक कारकों पर विचार किया जाना चाहिए।
यह निर्णय राज्य के पारिवारिक न्यायालयों के लिए एक दिशानिर्देश के रूप में काम करता है, जो अभिरक्षा निर्धारण में बच्चे के कल्याण को उसकी mere प्राथमिकता से ऊपर रखने पर बल देता है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय बच्च‑केंद्रित विधि विज्ञान के सिद्धांतों के अनुरूप है।