स्थानीय
माँ के इलाज के लिए 2,85,000 रुपये का बिल, राकेश पाल ने फ़ोनपे से जुटाया
राकेश पाल ने 2,85,000 रुपये के अस्पताल बिल को फ़ोनपे के माध्यम से जुटाकर अपनी माँ को डायलिसिस से बचाया।
26 सितंबर की रात, माँ कमला देवी का रक्तचाप और शुगर अचानक बहुत बढ़ गया, चक्कर लगकर गिर पड़ीं और गुर्दे का काम बंद हो गया। सरकारी अस्पताल में डायलिसिस का कोई बेड नहीं था, इसलिए राकेश पाल ने ऑटो लेकर सेक्टर‑27 के कैलाश अस्पताल पहुँचाया। माँ को केबिन 308, बेड 16‑A में भर्ती किया गया और डॉक्टर शर्मा ने रोज़ की ड्रिप, टेस्ट और डायलिसिस का खर्चा शुरू किया।
राकेश पाल, 38 वर्ष, नोएडा के भंगेल में रहते हैं। फेज‑2 की एक फैक्टरी में 24,000 रुपये की तनख्वाह मिलती है, 8,500 रुपये कमरा किराया और 2,200 रुपये बिजली बिल देने के बाद पूनम के पास जो बचता है, उससे 8‑वर्ष के बेटे रोहित को संभालना भी मुश्किल हो जाता है। पहली रात के लिए साले से 10,000 रुपये उधार लिए थे, पर अस्पताल का बिल बढ़ता ही जा रहा था। काउंटर पर कुल 2,85,000 रुपये का बिल थमा दिया गया, और डॉक्टर ने साफ़ बोल दिया कि आज ही पूरा बिल भरना पड़ेगा, नहीं तो डिस्चार्ज कर देंगे।
राकेश ने फ़ोनपे में 900 रुपये शेष रखे थे। उसी ऐप में 42,000 रुपये जमा हुए, फिर 11,40,000 रुपये के राउंड में लगातार जीतने के बाद कुल 2,85,000 रुपये जुटा लिए। सुबह 7 बजे काउंटर पर जाकर पूरा बिल चुका दिया गया, बिल वाले ने कागज़ पर PAID की मोहर लगा दी।
माँ को डायलिसिस जारी रखने के लिए अस्पताल में रहना पड़ा, और राकेश ने माँ का हाथ पकड़कर कहा, "मम्मी, घर नहीं जाना, यहीं रहना है।" रोहित ने भी पूछा, "अब्बू, दादी हमारे साथ ही रहेंगी ना?" राकेश ने यह कहानी इसलिए लिखी ताकि किसी और को भी बड़े पैसों से खेलना न पड़े।
राकेश पाल, 38 वर्ष, नोएडा के भंगेल में रहते हैं। फेज‑2 की एक फैक्टरी में 24,000 रुपये की तनख्वाह मिलती है, 8,500 रुपये कमरा किराया और 2,200 रुपये बिजली बिल देने के बाद पूनम के पास जो बचता है, उससे 8‑वर्ष के बेटे रोहित को संभालना भी मुश्किल हो जाता है। पहली रात के लिए साले से 10,000 रुपये उधार लिए थे, पर अस्पताल का बिल बढ़ता ही जा रहा था। काउंटर पर कुल 2,85,000 रुपये का बिल थमा दिया गया, और डॉक्टर ने साफ़ बोल दिया कि आज ही पूरा बिल भरना पड़ेगा, नहीं तो डिस्चार्ज कर देंगे।
राकेश ने फ़ोनपे में 900 रुपये शेष रखे थे। उसी ऐप में 42,000 रुपये जमा हुए, फिर 11,40,000 रुपये के राउंड में लगातार जीतने के बाद कुल 2,85,000 रुपये जुटा लिए। सुबह 7 बजे काउंटर पर जाकर पूरा बिल चुका दिया गया, बिल वाले ने कागज़ पर PAID की मोहर लगा दी।
माँ को डायलिसिस जारी रखने के लिए अस्पताल में रहना पड़ा, और राकेश ने माँ का हाथ पकड़कर कहा, "मम्मी, घर नहीं जाना, यहीं रहना है।" रोहित ने भी पूछा, "अब्बू, दादी हमारे साथ ही रहेंगी ना?" राकेश ने यह कहानी इसलिए लिखी ताकि किसी और को भी बड़े पैसों से खेलना न पड़े।