📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
शिक्षा
कोइलाख, मधुबनी: हर घर में आईएएस अधिकारी या डॉक्टर
✍️ News18
🗓 21 अग. 2026, 04:03 AM
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बिहार के मधुबनी जिले के कोइलाख गाँव में हर घर में आईएएस अधिकारी या डॉक्टर होने का अनोखा रिकॉर्ड बना है, जो पेशेवर उपलब्धियों की असाधारण एकत्रीकरण को दर्शाता है।
बिहार के मधुबनी जिले के कोइलाख गाँव ने एक अनोखा आँकड़ा सामने रखा है: यहाँ के प्रत्येक घर में या तो एक आईएएस अधिकारी या एक योग्य डॉक्टर रहता है। यह तथ्य, क्षेत्रीय मीडिया की रिपोर्टों में उजागर हुआ है, जो ग्रामीण भारत में दुर्लभ पेशेवर प्रतिनिधित्व को दर्शाता है।
सैकड़ों परिवारों वाले इस गाँव ने वर्षों में निरंतर रूप से सिविल सर्विस और चिकित्सा क्षेत्र में प्रतिभा उत्पन्न की है। स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि शिक्षा पर मजबूत ज़ोर, प्रतियोगी परीक्षाओं की शुरुआती तैयारी और सफलता को सम्मानित करने वाली सामुदायिक संस्कृति ने इस प्रवृत्ति को जन्म दिया है।
निवासियों के अनुसार, आईएएस अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी ने गाँव के दैनिक जीवन को बदल दिया है। बच्चों को मेंटरशिप मिलती है, जबकि स्वास्थ्य संबंधी सलाह और प्रशासनिक सहायता आसान हो गई है। इस सामूहिक उपलब्धि ने नीति निर्माताओं का ध्यान भी आकर्षित किया है, जो समान परिणाम अन्य पिछड़े क्षेत्रों में दोहराने की कोशिश कर रहे हैं।
सभी प्रशंसा के बावजूद, गाँव वाले बुनियादी ढाँचे की कमी और स्कूल व स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर निवेश की आवश्यकता जैसी चुनौतियों को भी स्वीकार करते हैं। फिर भी, कोइलाख की यह अनूठी उपलब्धि ग्रामीण सेटिंग में लक्षित शैक्षिक आकांक्षाओं के प्रभाव का प्रमाण है।
सैकड़ों परिवारों वाले इस गाँव ने वर्षों में निरंतर रूप से सिविल सर्विस और चिकित्सा क्षेत्र में प्रतिभा उत्पन्न की है। स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि शिक्षा पर मजबूत ज़ोर, प्रतियोगी परीक्षाओं की शुरुआती तैयारी और सफलता को सम्मानित करने वाली सामुदायिक संस्कृति ने इस प्रवृत्ति को जन्म दिया है।
निवासियों के अनुसार, आईएएस अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी ने गाँव के दैनिक जीवन को बदल दिया है। बच्चों को मेंटरशिप मिलती है, जबकि स्वास्थ्य संबंधी सलाह और प्रशासनिक सहायता आसान हो गई है। इस सामूहिक उपलब्धि ने नीति निर्माताओं का ध्यान भी आकर्षित किया है, जो समान परिणाम अन्य पिछड़े क्षेत्रों में दोहराने की कोशिश कर रहे हैं।
सभी प्रशंसा के बावजूद, गाँव वाले बुनियादी ढाँचे की कमी और स्कूल व स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर निवेश की आवश्यकता जैसी चुनौतियों को भी स्वीकार करते हैं। फिर भी, कोइलाख की यह अनूठी उपलब्धि ग्रामीण सेटिंग में लक्षित शैक्षिक आकांक्षाओं के प्रभाव का प्रमाण है।