📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
शिक्षा
कविंदर गुप्ता ने मातृभाषाओं व प्राचीन लिपियों के संरक्षण की अपील की
✍️ The News Mill
🗓 15 अक्टू. 2026, 01:46 AM
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कविंदर गुप्ता ने भारत की विविध मातृभाषाओं और प्राचीन लिपियों के संरक्षण के लिए त्वरित कदमों की मांग की।
कविंदर गुप्ता, जो सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाने जाते हैं, ने भारत की विविध मातृभाषाओं और उन लिपियों के संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि उचित प्रयास न किए जाने पर कई भाषाएँ और उनकी लेखन प्रणाली लुप्त हो सकती हैं, जिससे देश की भाषाई विविधता क्षीण हो जाएगी।
गुप्ता ने सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक समूहों से दस्तावेज़ीकरण और पुनरुज्जीवन कार्यक्रमों के लिए समन्वित कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने अनुसंधान के लिए संसाधन आवंटन, डिजिटल अभिलेख बनाना और स्कूलों में संकटग्रस्त भाषाओं के शिक्षण को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा।
यह अपील इस बात को रेखांकित करती है कि तेज़ शहरीकरण और कुछ प्रमुख भाषाओं के प्रभुत्व से कम बोली जाने वाली भाषाओं का पतन तेज़ हो रहा है। गुप्ता ने कहा कि इन भाषाओं में निहित पारम्परिक साहित्य और ज्ञान को संरक्षित करना सांस्कृतिक पहचान के लिए आवश्यक है।
अंत में उन्होंने नीति निर्माताओं से भाषा संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में मानने और आगे के नुकसान को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने का आह्वान किया।
गुप्ता ने सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक समूहों से दस्तावेज़ीकरण और पुनरुज्जीवन कार्यक्रमों के लिए समन्वित कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने अनुसंधान के लिए संसाधन आवंटन, डिजिटल अभिलेख बनाना और स्कूलों में संकटग्रस्त भाषाओं के शिक्षण को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा।
यह अपील इस बात को रेखांकित करती है कि तेज़ शहरीकरण और कुछ प्रमुख भाषाओं के प्रभुत्व से कम बोली जाने वाली भाषाओं का पतन तेज़ हो रहा है। गुप्ता ने कहा कि इन भाषाओं में निहित पारम्परिक साहित्य और ज्ञान को संरक्षित करना सांस्कृतिक पहचान के लिए आवश्यक है।
अंत में उन्होंने नीति निर्माताओं से भाषा संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में मानने और आगे के नुकसान को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने का आह्वान किया।