राजनीति
कटिहार के टाउन हॉल में 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' अभियान का हुआ भव्य समापन
कटिहार के टाउन हॉल में 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' अभियान का हुआ भव्य समापन
कटिहार, 4 नवंबर 2026
जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा आयोजित 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' अभियान का आज कटिहार के ऐतिहासिक टाउन हॉल में भव्य समापन हो गया. गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में तीन चरणों में चला यह व्यापक जन-जागरण अभियान कटिहार में अपने अंतिम और 12वें पड़ाव पर पहुंचा. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और सूबे की भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह,बरारी विधायक विजय सिंह, सुरज राय सहित कई वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
समारोह को संबोधित करते हुए जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई फरक्का जल संधि पर बिहार के रुख को पुरजोर तरीके से रखा. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "मौजूदा स्वरूप में इस संधि का नवीनीकरण बिहार को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है।" उन्होंने मांग की कि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही इस संधि के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा कोई भी निर्णय लेने से पहले बिहार की 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना अनिवार्य है.
संवाद कार्यक्रम की मुख्य बड़ी बातें:
संधि से बिहार को नुकसान: मुख्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शुष्क मौसम में गंगा के साथ-साथ बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है, जिससे राज्य के किसानों की सिंचाई, पेयजल और उद्योगों पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
• बाढ़ और सूखे की दोहरी मार:
प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बराज के कारण गंगा नदी में भारी गाद (सिल्ट) जमा हो गई है, जिससे नदी का तल ऊंचा हो गया है. इसके चलते बिहार को मानसून में भयानक बाढ़ और बाकी महीनों में जल संधि के कारण सूखे की दोहरी मार झेलनी पड़ती है.
• अभियान की पूर्णता: 5 सितंबर को बक्सर से शुरू हुआ यह 'नीतीश संवाद' अभियान आज उस कटिहार जिले में संपन्न हुआ जहां से गंगा नदी बिहार की सीमा से बाहर निकलती है.
भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने इस अभियान को बिहार के अस्तित्व और पर्यावरणीय हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने में सफल रही है.
इस भव्य और सफल आयोजन के साथ ही जदयू के इस ऐतिहासिक जन-संवाद का कटिहार की धरती पर शंखनाद के साथ समापन हुआ
जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा आयोजित 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' अभियान का आज कटिहार के ऐतिहासिक टाउन हॉल में भव्य समापन हो गया. गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में तीन चरणों में चला यह व्यापक जन-जागरण अभियान कटिहार में अपने अंतिम और 12वें पड़ाव पर पहुंचा. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और सूबे की भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह,बरारी विधायक विजय सिंह, सुरज राय सहित कई वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
समारोह को संबोधित करते हुए जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई फरक्का जल संधि पर बिहार के रुख को पुरजोर तरीके से रखा. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "मौजूदा स्वरूप में इस संधि का नवीनीकरण बिहार को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है।" उन्होंने मांग की कि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही इस संधि के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा कोई भी निर्णय लेने से पहले बिहार की 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना अनिवार्य है.
संवाद कार्यक्रम की मुख्य बड़ी बातें:
संधि से बिहार को नुकसान: मुख्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शुष्क मौसम में गंगा के साथ-साथ बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है, जिससे राज्य के किसानों की सिंचाई, पेयजल और उद्योगों पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
• बाढ़ और सूखे की दोहरी मार:
प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बराज के कारण गंगा नदी में भारी गाद (सिल्ट) जमा हो गई है, जिससे नदी का तल ऊंचा हो गया है. इसके चलते बिहार को मानसून में भयानक बाढ़ और बाकी महीनों में जल संधि के कारण सूखे की दोहरी मार झेलनी पड़ती है.
• अभियान की पूर्णता: 5 सितंबर को बक्सर से शुरू हुआ यह 'नीतीश संवाद' अभियान आज उस कटिहार जिले में संपन्न हुआ जहां से गंगा नदी बिहार की सीमा से बाहर निकलती है.
भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने इस अभियान को बिहार के अस्तित्व और पर्यावरणीय हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने में सफल रही है.
इस भव्य और सफल आयोजन के साथ ही जदयू के इस ऐतिहासिक जन-संवाद का कटिहार की धरती पर शंखनाद के साथ समापन हुआ