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05 अक्टू. 2026•
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कसेढ़ नदी में अवैध रेता और गांजा कारोबारियों पर 'कलम का

कसेढ़ नदी में अवैध रेता और गांजा कारोबारियों पर 'कलम का

✍️ रिपोर्टर: Manjur Mansoori 🗓 05 अक्टू. 2026, 05:30 PM 👁 63
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कसेढ़ नदी में अवैध रेता और गांजा कारोबारियों पर 'कलम का प्रहार': हथगला-कसेढ़ क्षेत्र से माफिया राज खत्म करने मैदान में उतरे पत्रकार
शहडोल। प्राकृतिक संसाधनों का सीना चीरकर अवैध कमाई करने वाले रेत माफिया और युवाओं की जिंदगी में जहर घोलने वाले गांजा तस्करों के खिलाफ अब निर्णायक जंग शुरू हो चुकी है। हथगला और कसेढ़ नदी क्षेत्र में पैर पसार चुके रेत व नशा सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पत्रकारों ने मोर्चा संभाल लिया है। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता का सीधा संकल्प है—"जब तक इस अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त नहीं करेंगे, तब तक थमने वाले नहीं हैं।"
कसेढ़ नदी का सीना चीर रहे माफिया, तस्करों की भी पैठ
हथगला और कसेढ़ नदी का तटीय इलाका लंबे समय से रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और नशीले पदार्थों के गुप्त ठिकानों के रूप में चर्चा में रहा है।
रेत का अवैध कारोबार: कसेढ़ नदी से बेधड़क रेत का अवैध खनन कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नष्ट किया जा रहा है।
गांजा तस्करी का नेटवर्क: इस दुर्गम तटीय क्षेत्र का फायदा उठाकर गांजा कारोबारी अपने ठिकाने बनाकर नेटवर्क चला रहे हैं।
मीडिया का कड़ा प्रहार: जमीनी पत्रकारों की टीम ने इस पूरे अवैध तंत्र की मैपिंग कर ली है। उत्खनन के रास्तों से लेकर नशा बिक्री के गुप्त ठिकानों का सच अब खुलकर सामने लाया जा रहा है।
पुलिस और जिला प्रशासन के सामने रखी जाएगी पूरी रिपोर्ट
पत्रकारों के इस कड़े रुख के बाद अब जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ रहा है। निष्पक्ष मीडिया कवरेज के जरिए पूरी स्थिति का कच्चा-चिट्ठा पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
कड़ी कार्रवाई की मांग: हथगला-कसेढ़ नदी क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने, खनिज विभाग द्वारा अचानक छापेमारी करने और तस्करों के वाहनों व ठिकानों को जब्त करने का दबाव बनाया जा रहा है।
जेल की सलाखें तैयार: प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अवैध खनन और गांजा तस्करी में शामिल किसी भी रसूखदार या माफिया को बख्शा न जाए।
जनता का मिला अटूट समर्थन
पत्रकारों की इस मुहिम से क्षेत्रीय ग्रामीणों और युवाओं में भारी उत्साह है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत माफिया और नशा कारोबारियों के खौफ से जो क्षेत्र कराह रहा था, अब कलम की ताकत से उस पर पूर्ण विराम लगेगा।
पत्रकार समाज का संदेश साफ है—"हथगला और कसेढ़ नदी को माफिया मुक्त कराकर ही दम लेंगे।"
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