📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Election commission of India
राजनीति
कर्नाटक सरकार ने 5% पार्क क्षेत्र प्रावधान को हटाने का फैसला, विवाद में
✍️ India Today
🗓 04 सित. 2026, 01:48 AM
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कर्नाटक की मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की सरकार ने 5% भूमि को पार्क के रूप में सुरक्षित रखने के नियम को हटाने का फैसला किया, जिससे विरोधी दलों में आलोचना हुई।
कर्नाटक की मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अगुवाई में राज्य कैबिनेट ने उस प्रावधान को रद्द करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत किसी भी विकास परियोजना में पाँच प्रतिशत भूमि को सार्वजनिक पार्क के रूप में सुरक्षित रखना अनिवार्य था। यह निर्णय कैबिनेट बैठक में घोषित किया गया और आगामी कर्नाटक पार्क्स बिल में शामिल किया जाएगा।
यह प्रावधान शहरी विस्तार और बुनियादी ढाँचे के तेज़ विकास के साथ हरित क्षेत्रों को संतुलित रखने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार और नागरिकों को मनोरंजन स्थल मिल सके। यह नियम नए आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं दोनों पर लागू होता था।
विपक्षी विधायक और कई पर्यावरणीय NGOs ने तुरंत इस कदम की आलोचना की, यह तर्क देते हुए कि यह कर्नाटक की सतत शहरी योजना के प्रति प्रतिबद्धता को कमजोर करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रावधान को हटाने से विशेषकर Bengaluru जैसे तेज़ी से बढ़ते शहरों में हरित आवरण में और कमी आ सकती है।
सरकार का कहना है कि यह प्रावधान निवेशकों के लिए बाधा बन गया था और आवश्यक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को धीमा कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि इस संशोधन पर राज्य विधानसभा में आने वाले हफ़्तों में चर्चा होगी और अंतिम निर्णय विधायी अनुमोदन पर निर्भर करेगा।
यह प्रावधान शहरी विस्तार और बुनियादी ढाँचे के तेज़ विकास के साथ हरित क्षेत्रों को संतुलित रखने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार और नागरिकों को मनोरंजन स्थल मिल सके। यह नियम नए आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं दोनों पर लागू होता था।
विपक्षी विधायक और कई पर्यावरणीय NGOs ने तुरंत इस कदम की आलोचना की, यह तर्क देते हुए कि यह कर्नाटक की सतत शहरी योजना के प्रति प्रतिबद्धता को कमजोर करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रावधान को हटाने से विशेषकर Bengaluru जैसे तेज़ी से बढ़ते शहरों में हरित आवरण में और कमी आ सकती है।
सरकार का कहना है कि यह प्रावधान निवेशकों के लिए बाधा बन गया था और आवश्यक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को धीमा कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि इस संशोधन पर राज्य विधानसभा में आने वाले हफ़्तों में चर्चा होगी और अंतिम निर्णय विधायी अनुमोदन पर निर्भर करेगा।