📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / News World India
राजनीति
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने बेंगलुरु के विकल्प के रूप में नए शहरों की योजना पर ज़ोर दिया
✍️ India Today
🗓 12 सित. 2026, 12:33 PM
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उपमुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने बेंगलुरु के विकल्प के रूप में कई उपनगर शहरों के विकास की योजना को दोहराया, जिससे शहरी भीड़भाड़ घटे और क्षेत्रीय विकास संतुलित हो।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने कहा कि बेंगलुरु के बढ़ते बुनियादी ढाँचे के दबाव को कम करने के लिए राज्य कई नए शहरों के निर्माण को तेज़ करेगा। उन्होंने देवनगरहली, होस्कोटे और नेलामंगला जैसे क्षेत्रों में चल रहे प्रोजेक्ट्स को "भविष्य के विकास केंद्र" बताया, जो उद्योग और आवास को आकर्षित करेंगे।
शिवाकुमार ने बताया कि बहु‑शहर मॉडल से ट्रैफ़िक जाम घटेगा, रियल‑एस्टेट की कीमतों पर दबाव कम होगा और पूरे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने निजी निवेशकों और डेवलपर्स से सरकार के साथ मिलकर विश्व‑स्तरीय सुविधाएँ, परिवहन नेटवर्क और टिकाऊ आवास बनाने का आह्वान किया।
मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य अतिरिक्त बजट आवंटित कर रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को तेज़ कर रहा है ताकि इन उपनगर शहरों का निर्माण समय पर हो सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि नए शहरों में आधुनिक नागरिक बुनियादी ढाँचा, स्कूल और अस्पताल उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे बेंगलुरु के भीड़भाड़ वाले केंद्र के विकल्प बनेंगे।
योजना अभी प्रारम्भिक चरण में है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि अगले तीन‑पाँच वर्षों में पहला चरण कार्यान्वित हो जाएगा, जिससे कर्नाटक भारत में संतुलित शहरी विस्तार का मॉडल बन सकेगा।
शिवाकुमार ने बताया कि बहु‑शहर मॉडल से ट्रैफ़िक जाम घटेगा, रियल‑एस्टेट की कीमतों पर दबाव कम होगा और पूरे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने निजी निवेशकों और डेवलपर्स से सरकार के साथ मिलकर विश्व‑स्तरीय सुविधाएँ, परिवहन नेटवर्क और टिकाऊ आवास बनाने का आह्वान किया।
मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य अतिरिक्त बजट आवंटित कर रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को तेज़ कर रहा है ताकि इन उपनगर शहरों का निर्माण समय पर हो सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि नए शहरों में आधुनिक नागरिक बुनियादी ढाँचा, स्कूल और अस्पताल उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे बेंगलुरु के भीड़भाड़ वाले केंद्र के विकल्प बनेंगे।
योजना अभी प्रारम्भिक चरण में है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि अगले तीन‑पाँच वर्षों में पहला चरण कार्यान्वित हो जाएगा, जिससे कर्नाटक भारत में संतुलित शहरी विस्तार का मॉडल बन सकेगा।