📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rajaramraok
खानपान
कर्नाटक में नंदिनी दही की कीमत बढ़ने से उपभोक्ताओं को झटका
✍️ News18
🗓 02 नव. 2026, 02:02 AM
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राज्य के नंदिनी ब्रांड ने दही की खुदरा कीमत बढ़ा दी, जिससे कर्नाटक के घरों में नई कीमत‑झटके का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य‑स्वामित्व वाली नंदिनी दही की खुदरा कीमत में वृद्धि की घोषणा की गई है, जो कई भारतीय घरों में रोज़मर्रा की आवश्यकता है। इस मूल्य संशोधन को हालिया बाजार सूची में दिखाया गया, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना पड़ा।
इस बढ़ोतरी को नई कीमत‑झटका कहा जा रहा है, क्योंकि नंदिनी दही पर निर्भर परिवार अब अपनी किराना बिल में अतिरिक्त खर्च देख रहे हैं। कर्नाटक के उपभोक्ता मंचों और सोशल मीडिया समूहों ने अपडेटेड दरें साझा कीं, जिससे घरेलू बजट पर तत्काल असर स्पष्ट हुआ।
विशेषज्ञों ने बताया कि यह वृद्धि देशभर में खाद्य महंगाई के उच्च स्तर के बीच आई है, जो निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। जबकि दुग्ध बोर्ड ने स्पष्ट कारण नहीं बताया, उच्च दूध खरीद और प्रसंस्करण लागत अक्सर ऐसे मूल्य समायोजन के पीछे के कारण माने जाते हैं।
न्यूज़18 ने नंदिनी दही के नवीनतम मूल्य बिंदु संकलित किए हैं, जिससे खरीदारों को नई कीमतों की तुलना करने में सुविधा मिलती है। प्लेटफ़ॉर्म ने उपभोक्ताओं को कर्नाटक मिल्क फ़ेडरेशन की आगे की घोषणाओं पर नज़र रखने की सलाह दी है।
दुग्ध बोर्ड से उम्मीद की जा रही है कि वह समय‑समय पर मूल्य नीति की समीक्षा करेगा, ताकि लागत वसूलते हुए राज्य के बड़े उपभोक्ता वर्ग की किफ़ायती जरूरतों को संतुलित किया जा सके।
इस बढ़ोतरी को नई कीमत‑झटका कहा जा रहा है, क्योंकि नंदिनी दही पर निर्भर परिवार अब अपनी किराना बिल में अतिरिक्त खर्च देख रहे हैं। कर्नाटक के उपभोक्ता मंचों और सोशल मीडिया समूहों ने अपडेटेड दरें साझा कीं, जिससे घरेलू बजट पर तत्काल असर स्पष्ट हुआ।
विशेषज्ञों ने बताया कि यह वृद्धि देशभर में खाद्य महंगाई के उच्च स्तर के बीच आई है, जो निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। जबकि दुग्ध बोर्ड ने स्पष्ट कारण नहीं बताया, उच्च दूध खरीद और प्रसंस्करण लागत अक्सर ऐसे मूल्य समायोजन के पीछे के कारण माने जाते हैं।
न्यूज़18 ने नंदिनी दही के नवीनतम मूल्य बिंदु संकलित किए हैं, जिससे खरीदारों को नई कीमतों की तुलना करने में सुविधा मिलती है। प्लेटफ़ॉर्म ने उपभोक्ताओं को कर्नाटक मिल्क फ़ेडरेशन की आगे की घोषणाओं पर नज़र रखने की सलाह दी है।
दुग्ध बोर्ड से उम्मीद की जा रही है कि वह समय‑समय पर मूल्य नीति की समीक्षा करेगा, ताकि लागत वसूलते हुए राज्य के बड़े उपभोक्ता वर्ग की किफ़ायती जरूरतों को संतुलित किया जा सके।