कोरबा SP को निष्पक्ष जांच के निर्देश, 8 अक्टूबर को जांच प्रतिवेदन के साथ आयोग के समक्ष उपस्थित होने का आदेश
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परिवार का दावा है कि मुस्कान के पिता नरेश चौहान अपनी नाबालिग बेटी के संबंध में शिकायत लेकर 21 और 22 जुलाई 2026 को थाना हरदी बाजार पहुंचे थे। परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई।
हरदी बाजार की 14 वर्षीय मुस्कान चौहान की आत्महत्या के मामले में अब एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, रायपुर ने संज्ञान लिया है। आयोग ने कोरबा पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे द्वारा प्रस्तुत आवेदन के बाद सामने आई है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा जारी आदेश क्रमांक 686/आयोग/2026, दिनांक 03 सितंबर 2026 में मामले को दर्ज करते हुए जांच के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने SP कोरबा को क्या निर्देश दिए?
आयोग ने अपने आदेश में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं—
1. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच
आवेदक प्रमोद कुमार बंजारे के आवेदन क्रमांक 73, दिनांक 20 अगस्त 2026 में उल्लेखित तथ्यों की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
2. सोशल मीडिया पर फोटो वायरल और शिकायत से जुड़े आरोपों की जांच
आयोग ने नाबालिग की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने तथा कथित मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की जांच करने को कहा है। साथ ही 21 और 22 जुलाई 2026 को थाना हरदी बाजार में शिकायत किए जाने के बावजूद शिकायत दर्ज नहीं किए जाने के आरोपों की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
3. जांच प्रतिवेदन के साथ आयोग के समक्ष उपस्थिति
आयोग ने संबंधित जांच अधिकारी को जांच प्रतिवेदन सहित 08 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोग कार्यालय, रायपुर में उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं।
4. दोष पाए जाने पर कार्रवाई
जांच में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त शिकायत एवं आरोपों के अनुसार, ग्राम हरदी बाजार की 14 वर्षीय मुस्कान चौहान की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परिवार ने उसे मानसिक रूप से परेशान किए जाने का आरोप लगाया था।
परिवार का दावा है कि मुस्कान के पिता नरेश चौहान अपनी नाबालिग बेटी के संबंध में शिकायत लेकर 21 और 22 जुलाई 2026 को थाना हरदी बाजार पहुंचे थे। परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई।
इसके बाद 24 जुलाई 2026 को मुस्कान ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
हालांकि, मामले में लगाए गए इन आरोपों की वास्तविकता और पुलिस की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। अब बाल अधिकार आयोग के संज्ञान के बाद इस मामले की जांच पर सभी की नजरें टिक गई हैं।
प्रमोद बंजारे की मुहिम के बाद आयोग तक पहुंचा मामला
मामले को लेकर सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे ने लगातार आवाज उठाई। उनके अनुसार, उन्होंने इस मामले को लेकर पहले राष्ट्रपति को पत्र भेजा और इसके बाद बाल अधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की।
आयोग द्वारा मामले पर संज्ञान लिए जाने को उन्होंने न्याय की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
प्रमोद बंजारे का कहना है कि अब जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि यदि परिवार वास्तव में दो दिनों तक शिकायत लेकर थाने पहुंचा था, तो उसकी शिकायत क्यों दर्ज नहीं की गई? साथ ही, उस अवधि की थाना CCTV फुटेज, रोज़नामचा एवं संबंधित पुलिस रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए।
अब पूरे मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 08 अक्टूबर 2026 है, जब कोरबा पुलिस को जांच प्रतिवेदन के साथ छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष उपस्थित होना है।
अब सवाल यह है—मुस्कान मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आखिर सच क्या सामने आएगा?
यह कार्रवाई सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे द्वारा प्रस्तुत आवेदन के बाद सामने आई है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा जारी आदेश क्रमांक 686/आयोग/2026, दिनांक 03 सितंबर 2026 में मामले को दर्ज करते हुए जांच के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने SP कोरबा को क्या निर्देश दिए?
आयोग ने अपने आदेश में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं—
1. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच
आवेदक प्रमोद कुमार बंजारे के आवेदन क्रमांक 73, दिनांक 20 अगस्त 2026 में उल्लेखित तथ्यों की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
2. सोशल मीडिया पर फोटो वायरल और शिकायत से जुड़े आरोपों की जांच
आयोग ने नाबालिग की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने तथा कथित मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की जांच करने को कहा है। साथ ही 21 और 22 जुलाई 2026 को थाना हरदी बाजार में शिकायत किए जाने के बावजूद शिकायत दर्ज नहीं किए जाने के आरोपों की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
3. जांच प्रतिवेदन के साथ आयोग के समक्ष उपस्थिति
आयोग ने संबंधित जांच अधिकारी को जांच प्रतिवेदन सहित 08 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोग कार्यालय, रायपुर में उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं।
4. दोष पाए जाने पर कार्रवाई
जांच में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त शिकायत एवं आरोपों के अनुसार, ग्राम हरदी बाजार की 14 वर्षीय मुस्कान चौहान की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परिवार ने उसे मानसिक रूप से परेशान किए जाने का आरोप लगाया था।
परिवार का दावा है कि मुस्कान के पिता नरेश चौहान अपनी नाबालिग बेटी के संबंध में शिकायत लेकर 21 और 22 जुलाई 2026 को थाना हरदी बाजार पहुंचे थे। परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई।
इसके बाद 24 जुलाई 2026 को मुस्कान ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
हालांकि, मामले में लगाए गए इन आरोपों की वास्तविकता और पुलिस की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। अब बाल अधिकार आयोग के संज्ञान के बाद इस मामले की जांच पर सभी की नजरें टिक गई हैं।
प्रमोद बंजारे की मुहिम के बाद आयोग तक पहुंचा मामला
मामले को लेकर सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे ने लगातार आवाज उठाई। उनके अनुसार, उन्होंने इस मामले को लेकर पहले राष्ट्रपति को पत्र भेजा और इसके बाद बाल अधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की।
आयोग द्वारा मामले पर संज्ञान लिए जाने को उन्होंने न्याय की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
प्रमोद बंजारे का कहना है कि अब जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि यदि परिवार वास्तव में दो दिनों तक शिकायत लेकर थाने पहुंचा था, तो उसकी शिकायत क्यों दर्ज नहीं की गई? साथ ही, उस अवधि की थाना CCTV फुटेज, रोज़नामचा एवं संबंधित पुलिस रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए।
अब पूरे मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 08 अक्टूबर 2026 है, जब कोरबा पुलिस को जांच प्रतिवेदन के साथ छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष उपस्थित होना है।
अब सवाल यह है—मुस्कान मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आखिर सच क्या सामने आएगा?