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06 Oct 2026•
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कनाडा से आए वंशजों ने बलिया के खरसरा में अपने पूर्वजों की जन्मभूमि की खोज पूरी की

✍️ Reporter: ANAND KUMAR PANDEY 🗓 06 Oct 2026, 02:18 AM 👁 9
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टोरंटो से आए 75 वर्षीय इमतेज और वर्नी अलाय ने 1871 के पुराने इमिग्रेशन पेपर के आधार पर बलिया जिले के खरसरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला में अपने पूर्वजों का पैतृक ठिकाना खोजा। उन्होंने जन्मभूमि की मिट्टी पर कदम रखकर भावुक हो गए।

बलिया जिले के खरसरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला में कनाडा के टोरंटो से आए दंपती 75 वर्षीय इमतेज और वर्नी अलाय ने लगभग 15 दिनों की खोजबीन के बाद अपने पूर्वजों का पैतृक ठिकाना पाया। इस खोज की आधार बनी 1871 की एक पुरानी इमिग्रेशन पर्ची थी, जिस पर अंग्रेज अधिकारी के हस्ताक्षर और पता दर्ज था।

पंचायत सचिव मिथिलेश कुमार पांडेय ने शनिवार को विदेशी मेहमानों को उनके पूर्वजों के गांव तक पहुंचाया। जन्मभूमि की मिट्टी पर कदम रखते ही इमतेज और वर्नी की आंखों में खुशी छलक उठी, हालांकि उन्हें घर का सही पता नहीं मिला और न ही कोई उनके परिवार से यहां रहता है।

इमतेज के अनुसार उनके परिवार की परदादी सोमेरिया, बहन मुराचिया और भाई कौलू यहीं से कोलकाता गए थे। 1871 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में कलकत्ता से कनाडा भेज दिए गए, जिसका इमिग्रेशन पेपर परिवार ने पीढ़ियों से संभलकर रखा था। उस समय इमतेज की उम्र महज 14 वर्ष थी और अन्य भाई‑बहनों की उम्र करीब दस और आठ वर्ष बताई जाती है।

इमतेज ने बताया कि ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में यह क्षेत्र गाजीपुर जिले का हिस्सा था और 1879 में इसे नए बने बलिया जिले में स्थानांतरित कर दिया गया। भूमि राजस्व वसूली को बेहतर बनाने के लिए अंग्रेजों ने इस बड़े परगने को दो हिस्सों में बांट दिया था।
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