धर्म
कुल्लू दशहरा में 200 किलोमीटर पैदल यात्रा पर कई देवी-देवता
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कुल्लू दशहरा महोत्सव के दौरान कई देवी-देवता 200 किलोमीटर पैदल यात्रा कर शहर में प्रवेश करेंगे।
कुल्लू दशहरा महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में कई देवी-देवता 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर शहर के मुख्य चौक में प्रवेश करेंगे। यह परम्परा दशहरा के समापन समारोह से पहले आयोजित की जाती है और स्थानीय जनसमुदाय में अत्यधिक उत्साह उत्पन्न करती है।
यात्रा का आरम्भ दूरस्थ पहाड़ी गाँवों से होता है जहाँ से देवी-देवता को विशेष सम्मान के साथ लेकर निकाला जाता है। मार्ग में विभिन्न ग्रामों के निवासियों द्वारा संगीत, नृत्य और पारम्परिक नृत्य‑गीतों के साथ स्वागत किया जाता है, जिससे यात्रा का माहौल पवित्रता और आनंद से भर जाता है।
इस वर्ष की यात्रा में कुल 200 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक विस्तृत मार्ग को दर्शाती है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष उपाय किए हैं, ताकि श्रद्धालु और यात्रियों दोनों का सुरक्षित प्रवास सुनिश्चित हो सके।
यात्रा के अंत में, देवी-देवता को विशेष मंच पर स्थापित किया जाएगा जहाँ से दशहरा के मुख्य समारोह का आरम्भ होगा। इस पावन परम्परा को देखते हुए, नागरिकों ने अपने-अपने घरों से तैयारियों में जुटकर इस महोत्सव को और भी भव्य बनाने का संकल्प लिया है।
यात्रा का आरम्भ दूरस्थ पहाड़ी गाँवों से होता है जहाँ से देवी-देवता को विशेष सम्मान के साथ लेकर निकाला जाता है। मार्ग में विभिन्न ग्रामों के निवासियों द्वारा संगीत, नृत्य और पारम्परिक नृत्य‑गीतों के साथ स्वागत किया जाता है, जिससे यात्रा का माहौल पवित्रता और आनंद से भर जाता है।
इस वर्ष की यात्रा में कुल 200 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक विस्तृत मार्ग को दर्शाती है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष उपाय किए हैं, ताकि श्रद्धालु और यात्रियों दोनों का सुरक्षित प्रवास सुनिश्चित हो सके।
यात्रा के अंत में, देवी-देवता को विशेष मंच पर स्थापित किया जाएगा जहाँ से दशहरा के मुख्य समारोह का आरम्भ होगा। इस पावन परम्परा को देखते हुए, नागरिकों ने अपने-अपने घरों से तैयारियों में जुटकर इस महोत्सव को और भी भव्य बनाने का संकल्प लिया है।