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13 Sep 2026
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कक्षा में पहुंचे सभापति सवालों से परखी बच्चों की प्रतिभा ‘सभापति की पाठशाला’ में चमके चार सितारे,शील्ड-सर्टिफिकेट से सम्मान

✍️ Reporter: Vishwanath Pratap Singh 🗓 13 Sep 2026, 07:00 PM 👁 26
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समय के साथ शिक्षा का स्वरूप बदला है लेकिन प्रतिभा आज भी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। जरूरत होती है तो उसे पहचानने प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ने का अवसर देने की। कोरबा के शासकीय माध्यमिक शाला पोड़ीबहार में आयोजित ‘सभापति की पाठशाला’ इसी सोच की एक सार्थक पहल के रूप में सामने आई।
नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने कक्षा में बच्चों के साथ बैठकर उनसे सामान्य ज्ञान, मानसिक योग्यता और बौद्धिक क्षमता से जुड़े सवाल किए। खास बात यह रही कि यहां शिक्षक और जनप्रतिनिधि के बीच की दूरी दिखाई नहीं दी बल्कि बच्चों के बीच बैठकर उनसे संवाद करने का प्रयास नजर आया। पोड़ीबहार की पार्षद एवं एमआईसी सदस्य श्रीमती चंद्रकली जायसवाल ने भी छत्तीसगढ़ के सामान्य ज्ञान और शारीरिक संरचना से जुड़े विषयों पर बच्चों को जानकारी दी।

शासकीय स्कूलों में शनिवार को एक्टिविटी डे के रूप में खेल, कला और सामान्य ज्ञान जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल बच्चों का मनोरंजन नहीं बल्कि उनकी झिझक दूर करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना भी है। यही वह उम्र है, जब बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को सही दिशा मिल जाए तो आगे चलकर वही प्रतिभा उनके भविष्य की पहचान बन सकती है।

‘सभापति की पाठशाला’ की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें प्रतिभाशाली बच्चों को केवल मंच पर बुलाकर सम्मानित नहीं किया जा रहा, बल्कि सवाल-जवाब और गतिविधियों के माध्यम से उनकी क्षमता को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रत्येक माह अलग-अलग शासकीय स्कूलों में पहुंचकर बच्चों से सीधे संवाद करना इस अभियान को महज औपचारिक कार्यक्रम से अलग बनाता है।
पोड़ीबहार में दामिनी सेन, स्मृति एलिना टोप्पो, आयुश खड़िया और वेदिका पटेल ने सामान्य ज्ञान एवं बौद्धिक क्षमता में बेहतर प्रदर्शन कर शील्ड और प्रमाण पत्र हासिल किए। इन बच्चों के लिए यह सम्मान शायद एक छोटा-सा पुरस्कार हो, लेकिन उनके आत्मविश्वास के लिए इसका महत्व कहीं बड़ा है। किसी बच्चे को यह एहसास होना कि उसकी प्रतिभा को पहचाना जा रहा है, उसके भीतर आगे बढ़ने की नई ऊर्जा पैदा कर सकता है।

दरअसल शासकीय स्कूलों को मजबूत करने की जिम्मेदारी केवल शिक्षकों की नहीं है। जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और शिक्षित नागरिक यदि समय निकालकर इन स्कूलों से जुड़ें, बच्चों से संवाद करें और उनकी समस्याओं को करीब से समझें तो शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे स्कूलों की समस्याएं भी सीधे सामने आती हैं और उनके समाधान का रास्ता भी खुलता है।

प्रतिभा को पहचानने वाली नजर और उसे आगे बढ़ाने वाला हाथ मिल जाए तो साधारण सी कक्षा भी भविष्य गढ़ने की पाठशाला बन सकती है। पोड़ीबहार की ‘सभापति की पाठशाला’ ने इसी उम्मीद को मजबूत किया है।
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