📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा, म्यूटेशन प्रक्रिया से जमीन का शीर्षक नहीं तय हो सकता
✍️ The New Indian Express
🗓 16 सित. 2026, 03:32 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि केवल म्यूटेशन रिकॉर्ड जमीन के स्वामित्व का प्रमाण नहीं बनते, उचित शीर्षक दस्तावेज़ आवश्यक हैं।
झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि म्यूटेशन प्रक्रिया, जो राजस्व अभिलेखों में स्वामित्व परिवर्तन को दर्ज करती है, जमीन के शीर्षक का निश्चित प्रमाण नहीं बन सकती। कोर्ट ने कहा कि वैध शीर्षक स्थापित करने के लिए उचित कानूनी दस्तावेज़ जैसे deed, बिक्री अनुबंध या न्यायालय का आदेश आवश्यक है, न कि केवल म्यूटेशन प्रविष्टियों पर निर्भर रहना।
यह निर्णय उन याचिकाओं के जवाब में आया जिसमें म्यूटेशन रिकॉर्ड को संपत्ति विवादों के समाधान के आधार के रूप में उपयोग करने को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि म्यूटेशन एक प्रशासनिक प्रविष्टि है, जिसका उद्देश्य राजस्व कार्य है और यह स्वामित्व अधिकार स्वचालित रूप से नहीं देता। इसलिए, स्वामित्व का दावा करने वाले पक्षों को अदालत के सामने स्पष्ट शीर्षक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला झारखंड में कई लंबित भूमि विवादों को प्रभावित करेगा, जहाँ अक्सर म्यूटेशन प्रमाणपत्र को स्वामित्व का प्रमाण माना जाता है। कोर्ट की यह स्पष्टता म्यूटेशन रिकॉर्ड के दुरुपयोग को रोकने और भूमि शीर्षक को उचित कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से सत्यापित करने के उद्देश्य से है।
यह निर्णय उन याचिकाओं के जवाब में आया जिसमें म्यूटेशन रिकॉर्ड को संपत्ति विवादों के समाधान के आधार के रूप में उपयोग करने को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि म्यूटेशन एक प्रशासनिक प्रविष्टि है, जिसका उद्देश्य राजस्व कार्य है और यह स्वामित्व अधिकार स्वचालित रूप से नहीं देता। इसलिए, स्वामित्व का दावा करने वाले पक्षों को अदालत के सामने स्पष्ट शीर्षक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला झारखंड में कई लंबित भूमि विवादों को प्रभावित करेगा, जहाँ अक्सर म्यूटेशन प्रमाणपत्र को स्वामित्व का प्रमाण माना जाता है। कोर्ट की यह स्पष्टता म्यूटेशन रिकॉर्ड के दुरुपयोग को रोकने और भूमि शीर्षक को उचित कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से सत्यापित करने के उद्देश्य से है।