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झारखंड हाई कोर्ट ने दिल्ली को मध्यस्थता स्थल मानने के राज्य के 2.5 साल के चुनौती को खारिज किया
✍️ LiveLawBiz
🗓 25 अग. 2026, 06:51 PM
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झारखंड हाई कोर्ट ने दिल्ली को मध्यस्थता स्थल मानने के राज्य के 2.5 साल के कानूनी चुनौती को खारिज कर पूर्व निर्धारित मान्यता को बरकरार रखा।
झारखंड हाई कोर्ट ने रांची में दिल्ली को मध्यस्थता स्थल मानने के राज्य सरकार के याचिका पर फैसला सुनाया। दो साल से अधिक समय तक चले मुकदमे के बाद, न्यायालय ने राज्य की चुनौती को खारिज कर यह पुष्टि की कि दिल्ली मौजूदा कानून के तहत मध्यस्थता का वैध स्थान बना रहेगा।
कोर्ट ने कहा कि राज्य के तर्कों में कोई वैधानिक उल्लंघन या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि नहीं पाई गई, इसलिए दिल्ली को मध्यस्थता स्थल मानने का पूर्व आदेश बरकरार रखा गया।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय व्यावसायिक विवादों के लिए तटस्थ मंच की तलाश करने वाले पक्षों को स्पष्टता प्रदान करता है और भारत में मध्यस्थता के क्षेत्र में दिल्ली की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
यह रुख भविष्य में अन्य राज्यों द्वारा मध्यस्थता स्थल के चयन को लेकर उठाए जाने वाले दावों पर प्रभाव डाल सकता है, पर वर्तमान में झारखंड हाई कोर्ट का यह निर्णय राष्ट्रीय न्यायिक प्रथा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।
कोर्ट ने कहा कि राज्य के तर्कों में कोई वैधानिक उल्लंघन या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि नहीं पाई गई, इसलिए दिल्ली को मध्यस्थता स्थल मानने का पूर्व आदेश बरकरार रखा गया।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय व्यावसायिक विवादों के लिए तटस्थ मंच की तलाश करने वाले पक्षों को स्पष्टता प्रदान करता है और भारत में मध्यस्थता के क्षेत्र में दिल्ली की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
यह रुख भविष्य में अन्य राज्यों द्वारा मध्यस्थता स्थल के चयन को लेकर उठाए जाने वाले दावों पर प्रभाव डाल सकता है, पर वर्तमान में झारखंड हाई कोर्ट का यह निर्णय राष्ट्रीय न्यायिक प्रथा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।