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कृषि
जम्मू-कश्मीर में फसल के बाद सेब की हानि 9.51% – संसद में रिपोर्ट
✍️ Kashmir Life
🗓 07 अग. 2026, 02:18 PM
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संसद में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में फसल के बाद सेब की हानि 9.51 प्रतिशत है, जिससे भंडारण और वितरण में चुनौतियाँ सामने आती हैं।
जम्मू-कश्मीर में सेब की खेती एक प्रमुख आजीविका स्रोत है, जहाँ यह क्षेत्र अपनी उच्च गुणवत्ता वाले फलों के लिए प्रसिद्ध है। संसद में प्रस्तुत हालिया अध्ययन के अनुसार फसल के बाद सेब की हानि 9.51 प्रतिशत है, जो भंडारण, परिवहन और बाजार प्रबंधन के दौरान होने वाली हानियों को दर्शाती है। यह आंकड़ा राज्य के कृषि विभागों और निजी प्रोसेसरों के डेटा पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि हर दस में से एक सेब फसल के बाद खो जाता है। इस हानि का किसानों पर आर्थिक असर गहरा है, जिससे आय घटती है और संरक्षण विधियों में सुधार के लिए लागत बढ़ती है। सरकार ने ठंडा भंडारण सुविधाओं को बढ़ाने और पश्च-फसल प्रबंधन पर प्रशिक्षण देने के योजनाएँ घोषित की हैं ताकि हानि घटाई जा सके।