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30 Sep 2026•
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जालहಳ್ಳಿ में एनआरबीसी की अवैज्ञानिक वाराबंदी के विरोध में विशाल धरना सत्याग्रह

✍️ Reporter: Khaja Hussain 🗓 30 Sep 2026, 07:10 PM 👁 17
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जालहಳ್ಳಿ में एनआरबीसी की अवैज्ञानिक वाराबंदी के विरोध में विशाल धरना सत्याग्रह

अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद किसानों ने धरना वापस लिया; पंपसेटों के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति का आश्वासन

जालहಳ್ಳಿ, 30 सितंबर: रायचूर जिले के देवदुर्ग तालुक के जालहಳ್ಳಿ गांव में एनआरबीसी (नारायणपुर राइट बैंक कैनाल) की जलापूर्ति में लागू अवैज्ञानिक वाराबंदी व्यवस्था के विरोध में तथा किसानों के पंपसेटों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग को लेकर बुधवार को कर्नाटक प्रांत रैत संघ (केपीआरएस) और जल उपयोगकर्ता संघों के नेतृत्व में जालहಳ್ಳಿ के अंबेडकर सर्कल में विशाल धरना सत्याग्रह आयोजित किया गया।

किसानों ने वर्तमान में लागू 14 दिन पानी छोड़ने और 10 दिन पानी बंद रखने की व्यवस्था में बदलाव कर 14 दिन पानी छोड़ने और 7 दिन बंद रखने की वैज्ञानिक वाराबंदी व्यवस्था लागू करने की मांग की।

इसके अलावा, एनआरबीसी नहरों के अंतिम छोर तक स्थित खेतों को भी पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा टेल-एंड किसानों को जलापूर्ति में आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग की गई।

किसानों के पंपसेटों को दिन के समय लगातार 7 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति करने की मांग भी रखी गई।

धरना सत्याग्रह को संबोधित करते हुए कर्नाटक प्रांत रैत संघ के जिला अध्यक्ष बसवंतरायगौड़ ने आरोप लगाया कि किसानों में एकता न बने, इसके लिए जाति आधारित विभाजन का माहौल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए साजिश की जा रही है और किसानों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

राजनेताओं से सवाल करना सीखें किसान

राज्य श्रमिक नेता कॉमरेड शब्बीर, जालहಳ್ಳಿ ने कहा कि देवदुर्ग तालुक की नहरों में सुधार कर किसानों के खेतों तक सही तरीके से पानी पहुंचाना है तो किसानों को क्षेत्र के राजनेताओं से सवाल करना सीखना होगा।

वाराबंदी की व्यवस्था अवैज्ञानिक

केपीआरएस के जिला सचिव कॉमरेड नरसन्ना नायक ने कहा कि एनआरबीसी नहरों में लागू वाराबंदी व्यवस्था ही अवैज्ञानिक है। किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए उचित निर्णय नहीं लेने वाले राजनेताओं के गलत फैसले के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। उन्होंने वाराबंदी को उद्योगों को पानी बेचने की साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया।

केबीजेएनएल सिंचाई विभाग तथा जेएसकॉम विभाग के अधिकारियों से किसानों की मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद धरना सत्याग्रह वापस ले लिया गया।

धरने में कर्नाटक प्रांत रैत संघ के जिला अध्यक्ष बसवंतरायगौड़, जिला सचिव नरसन्ना नायक, केपीआरएस तालुक अध्यक्ष हनुमंत गुरिकार, जल उपयोगकर्ता संघ के अध्यक्ष शिवराज यारकमट्टी, राज्य श्रमिक नेता शब्बीर जालहಳ್ಳಿ, हनुमंत मडिवाळ, दुरुगप्पा रामपाळी, साबण्णा हूगार, सिद्धप्पा गुमेदार, लक्कप्पा चिंचोडी, हुसैनप्पा गुत्तेदार, वासु मकलदोड्डी, मुदेप्पा पाटील, करवे नेता तम्मण्णा हेरुंडी, डी. वीरेंद्रगौड़, रंगप्पा मुराळ, बसवराज मंडलगुड़ा, संजीव रेड्डी, वीरेश अरकेरा, अब्दुल रहमान कुरैशी, तिम्मण्णा बंकलदोड्डी सहित विभिन्न गांवों के सैकड़ों किसान, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता तथा संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

रिपोर्ट: खाजा हुसैन बाबा, जालहಳ್ಳಿ
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